आश्रित के पहले से नौकरी में होने पर अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति कर्मचारी की मृत्यु की तिथि पर लागू नीति के अनुसार ही दी जा सकती है और यदि मृत कर्मचारी का कोई आश्रित पहले से नौकरी में है, तो ऐसी नियुक्ति का लाभ नहीं दिया जा सकता।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने इस सिद्धांत को दोहराते हुए मृत कर्मचारी के पुत्र और पत्नी द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
संबंधित कर्मचारी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड में सबऑर्डिनेट इंजीनियर के पद पर कार्यरत था और दिसंबर 2018 में सेवा के दौरान उसका निधन हो गया। उसके निधन के बाद उसके पुत्र ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। हालांकि, कंपनी ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि मृत कर्मचारी की पत्नी पहले से ही एक सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालय में शिक्षिका के रूप में कार्यरत है और वेतन के साथ-साथ फैमिली पेंशन भी प्राप्त कर रही है।
इस निर्णय से आहत होकर मृत कर्मचारी के पुत्र और पत्नी ने हाइकोर्ट का रुख किया।
उनका तर्क था कि परिवार अब भी गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। जून, 2024 में जारी संशोधित परिपत्र के अनुसार, ऐसे मामलों में भी अनुकंपा नियुक्ति पर विचार किया जा सकता है, जहां कोई अन्य आश्रित पहले से नौकरी में हो। उन्होंने यह भी कहा कि मृत कर्मचारी मूल रूप से गैर-कार्यकारी श्रेणी में नियुक्त था। इसलिए उस पर पुरानी कार्यकारी नीति लागू नहीं होनी चाहिए।
राज्य और कंपनी की ओर से यह दलील दी गई कि अनुकंपा नियुक्ति का दावा कर्मचारी की मृत्यु की तिथि पर लागू नीति से नियंत्रित होता है। चूंकि कर्मचारी की मृत्यु 2018 में हुई थी, इसलिए 1981 की नीति लागू होगी, जिसमें स्पष्ट प्रावधान है कि यदि मृत कर्मचारी का कोई आश्रित पहले से रोजगार में है, तो अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती। यह भी कहा गया कि 2024 का संशोधित परिपत्र पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता।
हाइकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई अधिकार नहीं है, बल्कि सामान्य भर्ती प्रक्रिया से एक अपवाद है, जिसका उद्देश्य केवल मृत कर्मचारी के परिवार को तत्काल आर्थिक संकट से उबारना होता है।
अदालत ने यह भी कहा कि नीति में बाद में किया गया संशोधन, जब तक उसमें स्पष्ट रूप से पूर्व प्रभाव से लागू होने का प्रावधान न हो, पुराने मामलों पर लागू नहीं किया जा सकता।
खंडपीठ ने यह निष्कर्ष निकाला कि मृत कर्मचारी के मामले में 1981 की नीति ही लागू होती है और उस नीति के अनुसार, यदि परिवार में पहले से कोई कमाने वाला सदस्य मौजूद है तो अनुकंपा नियुक्ति का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। चूंकि मृत कर्मचारी की पत्नी पहले से शिक्षिका के रूप में कार्यरत है, इसलिए पुत्र को अनुकंपा नियुक्ति देने का कोई आधार नहीं बनता।
इन सभी कारणों से हाइकोर्ट ने एकल पीठ के आदेश में किसी प्रकार की त्रुटि या अवैधता नहीं पाई और अपील खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में नीति का सख्ती से पालन किया जाना आवश्यक है।