दिल्ली दंगा मामले में ताहिर हुसैन का भाई शाह आलम बरी, कोर्ट ने कहा- गवाहों ने झूठी गवाही दी

Update: 2026-04-03 03:47 GMT

दिल्ली कोर्ट ने दंगों के मामले में हाल ही में नौ लोगों को बरी किया। इनमें AAP पार्षद ताहिर हुसैन के भाई शाह आलम भी शामिल हैं। इन पर 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान हुई हिंसा और तोड़फोड़ से जुड़े एक मामले में आरोप लगे थे।

कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिशनल सेशन जज परवीन सिंह ने कहा कि गवाहों की गवाही आम किस्म की थी और उनमें कोई खास बात नहीं थी।

जज ने यह भी कहा कि गवाहों ने घटनाओं की जगह के बारे में झूठी गवाही दी थी। इसलिए उन्होंने आलम, राशिद सैफी, मोहम्मद शादाब, हबीब, इरफान, सुहैल, सलीम, इरशाद और अजहर को बरी कर दिया।

कोर्ट ने कहा,

"मेरा मानना ​​है कि आरोपियों को दोषी ठहराने के लिए इन गवाहों की गवाही पर भरोसा करना सुरक्षित नहीं होगा। इसलिए मेरा मानना ​​है कि आरोपियों को 'संदेह का लाभ' (Benefit of Doubt) मिलना चाहिए। तदनुसार, सभी आरोपियों को उन पर लगाए गए आरोपों से बरी किया जाता है।"

यह फैसला दयालपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR 98/2020 के मामले में आया। अक्टूबर, 2023 में इन नौ आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC) की धारा 149, 188, 323, 326, 379, 427, 435, 436, 341 और 450 के तहत अपराधों के लिए आरोप तय किए गए थे।

यह मामला दंगों के दौरान हुई कई घटनाओं से जुड़ा था। इनमें एक इनोवा क्रिस्टा गाड़ी पर हमला और उसमें बैठे लोगों को चोट लगना, एक पुलिस अधिकारी की मोटरसाइकिल जलाना, सड़क किनारे ठेले लगाने वालों के ठेलों को लूटना और तोड़ना, एक ई-रिक्शा की तोड़फोड़ और चोरी और 'रॉयल ​​मोटर्स' नाम की दुकान में आग लगाना शामिल था।

सभी नौ लोगों को बरी करते हुए कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला कई अहम पहलुओं पर "पूरी तरह से बिखर जाता है"। इनमें इनोवा कार पर हमले की जगह और चांद बाग में दुकान में आग लगने की तारीख जैसे पहलू शामिल हैं।

कोर्ट ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष ने मुख्य रूप से तीन गवाहों—PW2, PW9 और PW11—पर भरोसा किया। इनका मकसद दंगाई भीड़ में आरोपियों की मौजूदगी और उनकी भूमिका को साबित करना था, लेकिन उनकी गवाही भरोसे लायक नहीं थी। रॉयल मोटर्स में हुई घटना के संबंध में कोर्ट ने यह पाया कि यह घटना 25 फरवरी, 2020 को हुई थी, न कि 24 फरवरी, 2020 को, जैसा कि अभियोजन पक्ष ने दावा किया।

जज ने कहा,

"ऐसी स्थिति में PW2, PW9 और PW11 न तो 24.02.2020 को यह घटना देख सकते थे और न ही वे आरोपी को रॉयल मोटर्स में दंगा, तोड़फोड़ और आगजनी करते हुए देख सकते थे।"

कोर्ट ने कहा,

"अन्य घटनाओं के संबंध में उनकी गवाहियां सामान्य प्रकृति की हैं, उनमें विशिष्टता की कमी है और विशेष रूप से इस तथ्य को देखते हुए कि इन गवाहों ने इनोवा क्रिस्टा कार की घटना के स्थान के साथ-साथ रॉयल मोटर्स की घटना की तारीख और इस घटना को देखने के संबंध में झूठी गवाही दी, मैं यह मानता हूं कि आरोपी को दोषी ठहराने के लिए इन गवाहों की गवाहियों पर भरोसा करना सुरक्षित नहीं होगा।"

बता दें, 2020 में एक अन्य दंगा मामले में भी शाह आलम को जज विनोद यादव ने बरी कर दिया था; जज ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाते हुए यह टिप्पणी की थी कि ऐसा प्रतीत होता है कि इस मामले में "चश्मदीद गवाहों, असली आरोपियों और तकनीकी सबूतों का पता लगाने के लिए कोई वास्तविक प्रयास किए बिना" केवल चार्जशीट दाखिल करके ही मामले को सुलझा लिया गया था।

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