कैदी को गैरकानूनी हिरासत में रखने का मामला : दिल्ली हाईकोर्ट ने DSLSA को जेल अधिकारियों को कानून, केस लॉ, बंदियों के अधिकार बताने के निर्देश दिए

Update: 2020-08-10 03:30 GMT

चेक बाउंस के मामलों में जमानत दिए जाने के बावजूद 10 दिनों तक किसी कैदी को गैरकानूनी हिरासत में रखने के एक मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि जेलों में तैनात अधिकारियों विशेष रूप से पुलिस अधीक्षकों उप-अधीक्षकों के रैंक के अधिकारी और सहायक अधीक्षकों को कानून के दायरे में अपने कर्तव्यों और दायित्वों से अवगत कराया जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।

न्यायमूर्ति हेमा कोहली और न्यायमूर्ति सुब्रह्मण्यम प्रसाद की बेंच ने पिछले महीने महानिदेशक (कारागार) दिल्ली को निर्देश दिया था कि इस बात की जांच की जाए कि एक अदालत द्वारा जमानत दिए जाने के 24 घंटे के भीतर बंदियों को कितने मौकों पर रिहा नहीं किया गया था।

अधीक्षक, सेंट्रल जेल- I द्वारा दिए गए अनुचित स्पष्टीकरण, जेल में याचिकाकर्ता को गैरकानूनी रूप से हिरासत में लेने के लिए याचिकाकर्ता को रिहाई के आदेश के बावजूद रिहा नहीं करने, सहित अन्य बातों के लिए गुरुवार को डी.जी. (जेल) ने बिना शर्त माफी मांगी।

डिवीजन बेंच को सूचित किया गया था कि वर्तमान मामले में हुई ऐसी किसी भी गलती को रोकने के लिए जेल (मुख्यालय) ने जेल में कैदियों को हिरासत में रखने और उनकी रिहाई के संबंध में जेल के रिकॉर्ड का निरीक्षण करने के लिए एक समिति गठित की है। इसके अलावा, सभी संबंधितों को सूचित करते हुए एक परिपत्र जारी किया गया है कि किसी भी व्यक्ति को बिना किसी वैध और उचित कारण के हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए और इस तरह की चूक के लिए दोषी अधिकारी को जिम्मेदार माना जाएगा।

महानिदेशक द्वारा प्रस्तुत स्थिति रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान कम से कम डेढ़ लाख कैदियों को रिहा किया गया है। इन सभी के संबंध में आंकड़ों को संकलित करने के लिए अदालत के निर्देशानुसार कार्य करना बेहद कठिन है और इसके लिए बहुत समय चाहिए ।

"डी.जी. (जेल), जो सुनवाई में उपस्थित थे, ने इस अदालत को आश्वासन दिया है कि बहुत आत्मनिरीक्षण के बाद, यह निर्णय लिया गया है कि विभाग के भीतर सुधार की जरूरत है", इस बात को पीठ ने नोट किया।

पीठ ने यह भी दर्ज किया कि 14 कानून अधिकारियों को बहुत जल्द ही अनुबंध के आधार पर नियुक्त किया जा रहा है और वे प्रत्येक जेल में जब भी आवश्यकता होगी, सलाह और मार्गदर्शन के लिए उपलब्ध रहेंगे।

हालाँकि, 20.06.2020 से आगे जेल में याचिकाकर्ता को गैरकानूनी रूप से हिरासत में रखने के लिए, अधीक्षक सेंट्रल जेल- I द्वारा पेश किए गए स्पष्टीकरण का ध्यान रखते हुए, पीठ की राय थी कि जेलों में तैनात अधिकारियों, विशेष रूप से, पुलिस अधीक्षकों, उप-अधीक्षकों और सहायक अधीक्षकों की रैंक को कानून में अपने कर्तव्यों और दायित्वों से अवगत कराया जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।

तदनुसार, सदस्य (सचिव), दिल्ली राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (DSLSA) को निर्देश दिया गया है कि वे उक्त उद्देश्य के जरूरत के मुताबिक ऑनलाइन कार्यशालाएं आयोजित करें। जेल अधीक्षक, उप-अधीक्षक और सहायक अधीक्षक, जेल और सभी 14 कानून अधिकारी जिन्हें जेल (मुख्यालय) द्वारा नियुक्त किया गया है, उक्त कार्यशालाओं में उन तिथियों पर भाग लेंगे, जो डीजी के परामर्श से तय की जाएगी।

उक्त कार्यशाला में कानून के प्रासंगिक प्रावधानों और केस लॉ के बारे में उपस्थित लोगों के साथ चर्चा की जाएगी। उन्हें कैदियों और उनके अधिकारों से संबंधित कानून की विभिन्न बारीकियों और जेल अधिकारियों के कर्तव्य से अवगत कराकर उन्हें योग्य बनाया जाएगा। यह निर्देश दिया गया है कि सदस्य (सचिव), डीएसएलएसए डीजी (जेल) के साथ मिलकर एक नियमित अंतराल पर और साल में कम से कम एक बार इसी तरह की कार्यशालाओं का आयोजन करेगा। 

आदेश की प्रति डाउनलोड करने के लिए यहांं क्लिक करेंं



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