न्यायिक जवाबदेही और सुधार के लिए अभियान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर जांच शुरू करने की मांग की। संगठन ने यह मांग लोकसभा की जांच समिति की उस रिपोर्ट के बाद की, जिसमें सरकारी आवास पर आग लगने की घटना के दौरान मिली बेहिसाब नकदी से जुड़े तीनों आरोपों को जस्टिस वर्मा के खिलाफ साबित माना गया।

जस्टिस वर्मा ने अप्रैल 2026 में इस्तीफा दे दिया था। इसके बावजूद CJAR ने जांच समिति की रिपोर्ट को सदन में पेश किए जाने के फैसले का समर्थन किया। संगठन का कहना है कि इस्तीफा देने के बाद भी मामले की जांच और जवाबदेही की प्रक्रिया समाप्त नहीं होनी चाहिए।

CJAR ने कहा कि जांच समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक प्रक्रिया में आगे बढ़ाना पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। संगठन ने यह भी कहा कि इससे उस पुराने उदाहरण को दोहराने से बचा गया, जिसमें जस्टिस पी.डी. दिनाकरन के इस्तीफे के बाद उनके खिलाफ चल रही महाभियोग प्रक्रिया समाप्त हो गई।

संगठन के अनुसार जस्टिस वर्मा के इस्तीफे और जांच समिति के निष्कर्षों के बाद उन्हें प्राप्त न्यायिक संरक्षण अब प्रभावी नहीं रह गया। इसलिए उनके खिलाफ FIR दर्ज करने के लिए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) की अनुमति की आवश्यकता नहीं है।

CJAR ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया से मांग की कि दिल्ली पुलिस को पूर्व जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास से मिली बेहिसाब नकदी के मामले में FIR दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया जाए। संगठन ने कहा कि जांच समिति की रिपोर्ट और न्यायपालिका की आंतरिक प्रक्रिया के तहत गठित तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट के बावजूद अब तक जांच एजेंसियों की ओर से FIR दर्ज नहीं की गई।

CJAR ने कहा कि जांच समिति द्वारा साबित माने गए आरोप केवल जज को पद से हटाने की कार्यवाही तक सीमित नहीं हैं। संगठन के अनुसार इन निष्कर्षों के आधार पर आपराधिक कार्रवाई की संभावना की भी जांच की जानी चाहिए।

संगठन ने मांग की कि पूर्व जस्टिस के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर हो ताकि न्यायपालिका में जनता का भरोसा मजबूत किया जा सके।

CJAR ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की वेबसाइट पर जस्टिस वर्मा की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाया। संगठन ने कहा कि उनके इस्तीफा देने के बावजूद वेबसाइट पर उन्हें अभी भी कार्यरत जस्टिस के रूप में दिखाया जा रहा है। CJAR ने हाईकोर्ट से वेबसाइट पर यह जानकारी तुरंत ठीक करने की मांग की ताकि किसी तरह का भ्रम न रहे।

इससे पहले CJAR ने तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव खन्ना द्वारा जस्टिस वर्मा के आवास से नकदी मिलने के आरोपों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सार्वजनिक किए जाने के फैसले का स्वागत किया। संगठन ने कहा कि गंभीर भ्रष्टाचार या कदाचार के आरोपों से निपटने में पारदर्शिता न्यायपालिका पर जनता के भरोसे के लिए जरूरी है।

अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Tags: