अप्रमाणित उपचार की मांग मरीज अधिकार के रूप में नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट

Update: 2026-01-31 10:17 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को स्पष्ट किया कि ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के इलाज के रूप में स्टेम सेल ट्रीटमेंट (SCT) को मरीज अधिकार के रूप में दावा नहीं कर सकते। अदालत ने इस तरह के उपचार को नियमित क्लिनिकल ट्रीटमेंट के तौर पर अपनाने को अवैज्ञानिक बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की और कहा कि ऐसा करने वाले डॉक्टरों व क्लीनिकों की गतिविधियां मेडिकल कदाचार (malpractice) के दायरे में आती हैं।

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने यह भी विचार किया कि क्या मरीज की स्वायत्तता (patient autonomy) उसे किसी अप्रमाणित इलाज के लिए सहमति देने का अधिकार देती है। इस पर अदालत ने दो टूक कहा—

“मरीज किसी अप्रमाणित उपचार की मांग अधिकार के रूप में नहीं कर सकता।”

'पर्याप्त जानकारी' के बिना सहमति वैध नहीं

अदालत ने अपने पूर्व निर्णय Samira Kohli बनाम डॉ. प्रभा मंछंदा (2008) का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी चिकित्सा उपचार के लिए 'पर्याप्त जानकारी' (adequate information) सहमति की बुनियाद है। वैध सहमति तभी मानी जाएगी, जब मरीज को—

उपचार की प्रकृति, प्रक्रिया, उद्देश्य, लाभ और प्रभाव

उपलब्ध वैकल्पिक उपचार

प्रमुख जोखिमों की रूपरेखा

उपचार न कराने के दुष्परिणाम

के बारे में स्पष्ट और संपूर्ण जानकारी दी गई हो।

SCT के मामले में 'पर्याप्त जानकारी' का अभाव

कोर्ट ने कहा कि यह निर्विवाद है कि ASD के उपचार में स्टेम सेल थैरेपी 'पर्याप्त जानकारी' की आवश्यक शर्तों को पूरा नहीं करती। ऐसे में मरीजों के मन में थेरैप्यूटिक मिसकन्सेप्शन पैदा हो सकता है—यानी वे अप्रमाणित इलाज से वही परिणाम अपेक्षित कर बैठते हैं, जो सामान्य और प्रमाणित उपचार से होते हैं।

अदालत ने टिप्पणी की—

“ऐसी स्थिति में मरीजों को उपचार देना, जबकि वे गलत धारणा में हों, हमारे मत में चिकित्सा नैतिकता का गंभीर उल्लंघन है।”

स्वैच्छिक विकल्प भी वैध सहमति नहीं

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही मरीज स्वेच्छा से ऐसे उपचार का विकल्प चुनता हो, लेकिन 'पर्याप्त जानकारी' के अभाव में दी गई सहमति वैध नहीं मानी जा सकती। इसलिए इस आधार पर SCT को नियमित इलाज के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि मरीजों को स्वीकृत और विनियमित (approved and regulated) क्लिनिकल ट्रायल्स में भाग लेने की स्वतंत्रता है।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ASD के इलाज में स्टेम सेल थैरेपी को न तो अधिकार के रूप में मांगा जा सकता है और न ही इसे नियमित चिकित्सा उपचार की तरह अपनाया जा सकता है, जब तक इसके बारे में पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण और जानकारी उपलब्ध न हो।

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