सत्य निकेतन पीजी हादसा: मालिक और पत्नी न्यायिक हिरासत में, बेटे को दो दिन की पुलिस हिरासत
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला पीजी इमारत गिरने के मामले में अदालत ने भवन मालिक हरिराम गुप्ता और उसकी पत्नी उर्मिला को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वहीं उनके बेटे महेश को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया।
पटियाला हाउस कोर्ट की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी भव्या करहैल ने सोमवार शाम यह आदेश दिया। तीनों आरोपियों को गिरफ्तारी के बाद देर रात न्यायाधीश के आवास पर पेश किया गया।
सत्य निकेतन इलाके में छह सितंबर को पांच मंजिला पीजी इमारत अचानक ढह गई थी। इमारत में दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के पास छात्रों के रहने के लिए लड़कों का पीजी संचालित हो रहा था। हादसे में कई लोगों की मौत और कई छात्रों के घायल होने की सूचना सामने आई।
दिल्ली पुलिस ने मामले में तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। भवन मालिक हरिराम को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार किया गया। उसके बेटे महेश और पत्नी उर्मिला को भी मामले में आरोपी बनाया गया।
पुलिस के अनुसार इमारत का बिजली कनेक्शन हरिराम के नाम पर था। आरोप है कि महेश संपत्ति और पीजी के प्रबंधन से जुड़े काम देखता था जबकि कागजों में संपत्ति उर्मिला के नाम पर थी।
पुलिस ने साउथ कैंपस थाने में तीनों के खिलाफ मामला दर्ज किया। आरोपियों पर गैर इरादतन हत्या, इमारत के रखरखाव में लापरवाही और लोगों की जान को खतरे में डालने जैसी धाराओं के तहत कार्रवाई की गई।
बताया गया कि इमारत करीब दोपहर डेढ़ बजे उस समय ढही, जब उसके बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि बेसमेंट में पानी भरा हुआ था, जिससे इमारत की संरचना कमजोर हुई हो सकती है। हालांकि हादसे के वास्तविक कारण की जांच जारी है।
इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने हादसे से प्रभावित छात्रों की जान बचाने के लिए प्रशासन को राहत एवं बचाव प्रयास दोगुने करने का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट ने दिल्ली नगर निगम को मामले को सर्वोच्च प्रशासनिक स्तर पर उठाने और यह जांच कराने का निर्देश दिया कि ढही इमारतें वैध अनुमति के तहत बनाई गईं या नहीं।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में निर्माण के लिए वैध अनुमति नहीं होने की बात सामने आती है तो लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाए।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब हादसे में भवन निर्माण की अनुमति, सुरक्षा मानकों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।