मुक़दमेबाज़ के ड्राइवर ने रिकॉर्ड की कोर्ट की कार्यवाही: हाईकोर्ट ने ज़ब्त किया मोबाइल, अवमानना नोटिस जारी

Update: 2026-05-12 17:18 GMT

राजस्थान हाईकोर्ट ने मुक़दमेबाज़ और उसके ड्राइवर को कारण बताओ नोटिस जारी किया। इन पर आरोप है कि इन्होंने गुपचुप और बिना अनुमति के मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करके कोर्ट की कार्यवाही रिकॉर्ड की। कोर्ट ने इस काम को 'न्यायालय अवमानना ​​अधिनियम, 1971' के तहत प्रथम दृष्टया 'आपराधिक अवमानना' माना है।

जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने टिप्पणी की कि इन हरकतों से न केवल न्याय प्रशासन में बाधा उत्पन्न हुई, बल्कि कोर्ट की गरिमा भी कम हुई।

मामले की पृष्ठभूमि

उक्त मामले की सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने पाया कि कोई व्यक्ति कार्यवाही को रिकॉर्ड कर रहा था। पूछताछ करने पर उस व्यक्ति ने यह बात स्वीकार की और बताया कि वह उस याचिकाकर्ता का ड्राइवर है, जिसके मामले की सुनवाई चल रही थी।

इस काम को "न्याय प्रशासन में गंभीर हस्तक्षेप" और प्रथम दृष्टया आपराधिक अवमानना ​​का मामला बताया गया।

कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया,

"यहाँ तक कि 'राजस्थान हाई कोर्ट (कोर्ट के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) नियम, 2020' का नियम 3(vi) भी कोर्ट की कार्यवाही को किसी भी तरह से रिकॉर्ड करने पर स्पष्ट और साफ़ तौर पर रोक लगाता है। इस नियम में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा कार्यवाही की कोई भी अनधिकृत रिकॉर्डिंग नहीं की जाएगी।"

इस पृष्ठभूमि में कोर्ट ने ड्राइवर और मामले से जुड़े याचिकाकर्ता को नोटिस जारी करके यह बताने को कहा कि उनके ख़िलाफ़ अवमानना ​​की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।

इसके अलावा, यह देखते हुए कि ड्राइवर का काम न्यायिक कार्यवाही में जानबूझकर बाधा डालने जैसा भी था, कोर्ट ने रजिस्ट्रार को ड्राइवर के ख़िलाफ़ रिपोर्ट दर्ज करने का निर्देश दिया।

साथ ही रजिस्ट्रार को ड्राइवर का मोबाइल फ़ोन ज़ब्त करने का निर्देश दिया गया, जबकि स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) को उसके ख़िलाफ़ उचित कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।

Title: Kamal Rathore v State of Rajasthan, and other connected matters

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