पहले प्वॉइंंट बनाएंं और फिर उससे जुड़े तथ्य और कानून पेश करेंः सीनियर एडवोकेट अखिल सिब्‍बल ने केस लड़ने की कला पर कहा

Update: 2020-05-26 11:29 GMT

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने एक वेब‌िनार में कोर्ट में केस की ब्रीफिंग और दलीलों को सुव्यवस्थित करने के अपने दृष्टिकोण पर चर्चा की। वह 'मास्टरींग ब्रीफ्स एंड स्ट्रक्चरिंग आर्ग्यूमेंट्स' विषय पर आर एंड आर लॉ चैम्बर्स की ओर से आयोजित एक वेबिनार में बात कर रहे थे। सत्र का संचालन आर एंड आर लॉ चैंबर्स के पार्टनर्स रोहन बत्रा और रीना चौधरी ने किया।

सत्र की महत्वपूर्ण बातें:

अखिल सिब्बल ने कहा कि तर्कों को सुव्यस्थित करने का उनके पास कोई स्ट्रेट-जैकेट फॉर्मूला नहीं है, इसके लिए वह अदालत में एक सामान्य पैटर्न का अनुकरण करते हैं।

यदि प्रारंभिक आपत्तियां हैं तो उन्हें शुरुआत में ही उठाया जाएगा। जैसा कि मेर‌िट का संबंध है तो प्रयास यह हो कि जितनी जल्दी हो सके सर्वोत्तम बिंदुओं को सामने रखा जाए, और तथ्यों के विस्तृत वर्णन से बचा जाए।

उन्होंने कहा,

"मेरा शुरुआती बिंदु होता है कि तथ्यों के साथ शुरू नहीं किया जाए। मैं नहीं चाहता कि जज यह जानने के लिए अधीर हो जाए कि तर्क क्या हैं। जितनी जल्दी जज को पता चलेगा कि तर्क क्या है, उतनी जल्दी वह इसके बारे में सोचना शुरू कर सकते हैं। फिर तथ्य, जैसा कि आप कहते हैं कि तब उन्हें पेश करने के लिए एक संदर्भ होगा। तर्क न हो तो न्यायाधीश ये नहीं समझ पाते कि आप क्यों किसी तथ्य पर ध्यान दे रहे हैं और किसी को छोड़ रहे हैं। इसलिए मैं शुरुआत में तर्क रखने की कोशिश करता हूं और बाद में विवरण देता हूं।"

उन्होंने कहा कि यह तरीका तर्कों को अधिक सामंजस्यपूर्ण बनाता है। उन्होंने कहा, तर्क स्पष्ट करें, संबंधित तथ्यों को रखें, और समर्थ में संबंधित कानून पेश करें- यही मेरा पैटर्न है।

तथ्य और कानून के प्रस्तावों के संदर्भ में सोचें

उन्होंने कहा कि "तथ्यों और कानून के प्रस्तावों" के संदर्भ में सोचना महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा, "तथ्य, क्या हुआ का एक बयान है। तथ्य का प्रस्ताव एक तथ्यात्मक निष्कर्ष है, जिसे आप तथ्य से प्राप्त करना चाहते हैं; यह वह बिंदु है, जिसे आप तथ्य के संबंध में बनाना चाहते हैं। यह तर्क के साथ जुड़ा तथ्य है।",

तथ्यों का प्रस्ताव, तथ्यों के वर्णन की तुलना में तर्क को स्‍थापति करने में अधिक प्रभावी है।

शुरुआती प्रस्तुतियां

उन्होंने कहा कि उनकी पसंदीदा शैली यह है कि जज तुरंत सोचना शुरु कर दे। उन बिंदुओं से सोचना शुरू करें, जो जज को रुच‌िकर लगे। उन्होंने कहा कि नाटकीय शुरुआत करना उनकी व्यक्तिगत शैली नहीं है, बल्कि वह केंद्रित शुरुआत पसंद करते हैं।

उन्होंने कहा, "कुछ वकील नाटकीयता करते हैं। इससे फायदा भी होता है। लेकिन यह व्यक्तिगत शैली की बात है।"

विपरीत पक्ष के तर्क को जानने की जरूरत है।

विपरीत पक्ष के तर्क को जानना महत्वपूर्ण है। उसी पर अपने तर्क के निर्माण की कोशिश करनी चाहिए और उसे ध्वस्त करना चाहिए। विपरीत पक्ष की दलीलों संबंध में, जिन्हें उनकी ब्रीफ या दलीलों में बताया गया है, आऊट ऑफ बॉक्स भी सोचना चाहिए।

बुरे तर्कों के साथ अच्छे तर्कों को संयोजित न करें

यदि आप बुरे तर्कों के साथ अच्छे तर्कों को जोड़ते हैं, तो आपके मामले की विश्वसनीयता कम हो सकती है।

जज किसी तरह से आपके मामले को समझेगा, यह आपके तर्कों के समग्र प्रभाव से तय होगा। यदि आप अच्छे तर्कों के साथ खराब बहस करते हैं, तो जज आपके बेहतर बिंदुओं पर भी संदेह करना शुरू कर देता है।

उन्होंने कहा कि समय सीमित होने के कारण, ऐसे ही तर्कों पर ध्यान दें, जिनसे जीत हो सके।

लचीला होना भी चाहिए

उन्होंने कहा कि यदि आपने जो तर्क सोचा है वह जज को प्रभावित नहीं कर पा रहा है तो उसे एक बिंदु से आगे न बढ़ाएं।

एक वकील के रूप में आपको लचीलेपन की आवश्यकता होती है, और आपको तेजी से सोचने की ज़रूरत होती है। अन्यथा, आपका मामला पटरी से उतर जाएगा और आप कहीं नहीं पहुंचेंगे।

ब्रीफ में माहिर

सिब्बल ने ब्रीफ्स को समझने के अपने ​​दृष्टिकोण पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि वह कभी भी बिना ब्रीफ पढ़े अदालत नहीं जाते। उन्होंने कहा, "केवल एक नोट पढ़कर, जिसे आपके जूनियर ने तैयार किया है, अदालत जाना जोखिम भरा होता है। मैं इसकी सिफारिश नहीं करूंगा।"

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