वकीलों के संगठन ने SIR की कानूनी वैधता और असर की जांच के लिए पूर्व जजों का आयोग बनाया
'लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन' (LAFC) ने भारत के चुनाव आयोग (ECI) द्वारा वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) की संवैधानिक वैधता, तरीके और असर की जांच के लिए पांच पूर्व सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट जजों का एक स्वतंत्र आयोग बनाया।
इस आयोग के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एमबी लोकुर होंगे। इसके अन्य सदस्यों में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एके पटनायक, जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस बदर दुर्रेज़ अहमद, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रेखा शर्मा और पटना हाई कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस अंजना प्रकाश शामिल हैं।
LAFC की ओर से जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, यह आयोग चुनाव आयोग द्वारा किए गए SIR अभियान के डिजाइन, उसे लागू करने के तरीके और उसके नतीजों को लेकर नागरिकों की चिंताओं के जवाब में बनाया गया।
आयोग स्वतंत्र रूप से जांच करेगा कि क्या इस प्रक्रिया में यह सुनिश्चित किया गया कि हर योग्य नागरिक वोटर लिस्ट में शामिल रहे और अयोग्य लोगों के नाम सही तरीके से हटाए जाएं। इसकी जांच में SIR प्रक्रिया की संवैधानिक और कानूनी वैधता, इसके तरीके और योग्य वोटरों पर इसके कुल असर को शामिल किया जाएगा।
आयोग देश भर में पूरी और क्षेत्रीय बेंचों के माध्यम से जन-सुनवाई करेगा। यह प्रभावित नागरिकों, सिविल सोसाइटी समूहों और विशेषज्ञों के बयान सुनेगा।
एक समर्पित रिसर्च विंग देश भर में वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने से जुड़े डेटा को इकट्ठा और उसका विश्लेषण करेगा और नतीजों को आयोग के सामने रखेगा। एक कानूनी सहायता टीम संवैधानिक सुरक्षा उपायों के पालन का आकलन करने के लिए संबंधित कानूनों, नोटिफिकेशन और वेरिफिकेशन प्रक्रियाओं की भी जांच करेगी।
सीनियर वकील कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण, चंद्र उदय सिंह, प्रशांतो चंद्र सेन और राजू रामचंद्रन के साथ-साथ वकील रेबेका मैमेन जॉन, वारिशा फरासत और वृंदा ग्रोवर आदि आयोग को कानूनी सहायता देंगे।
प्रेस रिलीज में कहा गया कि आयोग अपने नतीजों और सिफारिशों के लिए पूरी तरह जिम्मेदार होगा। न तो प्रायोजक संगठन और न ही सहयोगी समितियां पूर्व जजों के मुख्य फैसलों या निष्कर्षों को प्रभावित करेंगी।
LAFC में स्थित समन्वय समिति और सचिवालय आयोग को कामकाज में सहायता प्रदान करेंगे। आयोग का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक अपनी जांच पूरी करना और अपनी अंतिम रिपोर्ट जनता के सामने जारी करना है।