दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने गुरुवार (14 मई) को शराब नीति मामले की सुनवाई से खुद को अलग किया। उन्होंने कहा कि चूंकि उन्होंने AAP नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, विनय मिश्रा और सौरभ भारद्वाज के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की है, इसलिए वे आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और अन्य को बरी किए जाने के खिलाफ CBI की याचिका की सुनवाई नहीं करेंगी।
उन्होंने कहा कि जो जज अवमानना की कार्यवाही शुरू करता है, वह मुख्य मामले की सुनवाई नहीं कर सकता।
इसलिए चीफ जस्टिस के आदेशों के अधीन, इस मामले को किसी दूसरी बेंच को सौंप दिया जाएगा।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि वह अपने उस आदेश पर कायम हैं, जिसमें उन्होंने AAP नेताओं द्वारा दायर की गई खुद को सुनवाई से अलग करने (Recusal) वाली अर्जियों को खारिज कर दिया था।
उन्होंने कहा,
"मैं अपने उस आदेश पर कायम हूं। मैं उसमें एक भी शब्द नहीं बदलूंगी... मैंने इस संस्था और खुद के लिए स्टैंड लिया है।"
कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई कोई दूसरी बेंच करेगी। क्योंकि कानून के अनुसार, जो जज अवमानना की कार्यवाही शुरू करता है, वह मुख्य मामले की सुनवाई नहीं कर सकता। खुद को सुनवाई से अलग करने का फैसला (Recusal) यथावत रहेगा, लेकिन मैं इस मामले को किसी दूसरी कोर्ट में भेजूंगी।