गौतम गंभीर ने 'पर्सनैलिटी राइट्स' की सुरक्षा के लिए दायर केस में उल्लंघन करने वाले कंटेंट के खिलाफ अंतरिम राहत की अर्जी वापस ली

Update: 2026-03-23 11:33 GMT

भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने सोमवार (23 मार्च को) दिल्ली हाईकोर्ट से अपनी वह अर्जी वापस ली, जिसमें उन्होंने ऐसे कंटेंट के खिलाफ अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी, जो कथित तौर पर उनके 'पर्सनैलिटी राइट्स' का उल्लंघन कर रहा था।

यह अर्जी उनके मुख्य केस के तहत दायर की गई, जिसमें उन्होंने अपने 'पर्सनैलिटी राइट्स' की सुरक्षा की मांग की।

सोमवार सुबह इस मामले की सुनवाई शुरू हुई तो जस्टिस ज्योति सिंह ने गंभीर की ओर से पेश वकील जय अनंत देहाद्रई से पूछा, "कंटेंट हटाने (Take Down) की मांग कहां है?"

देहाद्रई ने कोर्ट को बताया कि उल्लंघन करने वाले कंटेंट को हटाने की मांग को एक "मौखिक मांग" के तौर पर माना जा सकता है।

हालांकि, कोर्ट ने मौखिक रूप से पूछा,

"(आदेश) 39 (नियम) 1 और 2 इस तरह से कैसे काम करते हैं?"

मेटा (Meta) के वकील ने कोर्ट को बताया,

"माई लॉर्ड्स, आप निर्देश दे सकते हैं, हम कंटेंट हटा देंगे। आज जो मांग की गई, वह बहुत व्यापक है। इस हद तक जब भी आप अपलोड करने वालों के संबंध में कोई आदेश पारित करेंगे तो आप उन्हें निर्देश दे सकते हैं। उसके बाद हम कंटेंट हटा देंगे।"

कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई दोपहर 2:30 बजे तक के लिए टाल दी और देहाद्रई से कहा कि वे मेटा के वकील के साथ बैठकर उल्लंघन करने वाले कंटेंट की पहचान करें।

दोपहर के भोजन के बाद जब इस मामले की सुनवाई दोबारा शुरू हुई तो वादी (गंभीर) ने अंतरिम रोक लगाने वाली अर्जी वापस लेने की मांग की।

कोर्ट ने अपने आदेश में यह दर्ज किया:

"वादी के वकील इस अर्जी (अंतरिम रोक) को वापस लेना चाहते हैं। उन्हें यह छूट दी जाती है कि वे उसी आधार पर पूरी और बेहतर जानकारी के साथ एक नई अर्जी दायर कर सकें। इस अर्जी को वापस लिया गया मानकर निपटा दिया जाता है, और जैसा कि मांग की गई, वैसी ही छूट दी जाती है।"

गंभीर ने प्रतिवादियों से, जिनमें 'जॉन डो' (अज्ञात संस्थाएं) भी शामिल हैं, 2.5 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों ने व्यावसायिक लाभ और गलत सूचना फैलाने के अभियानों के लिए उनके नाम, छवि और रूप का गलत इस्तेमाल किया।

गंभीर AI-जनरेटेड 'डीपफेक' और छेड़छाड़ किए गए वीडियो के तेजी से फैलने से परेशान हैं; इन वीडियो में झूठे तौर पर उनके नाम से बयान और कार्य जोड़े जाते हैं। इसलिए उन्होंने इंस्टाग्राम, X (पहले ट्विटर), यूट्यूब और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से ऐसे उल्लंघन करने वाले और गुमराह करने वाले कंटेंट को हटाने की मांग की।

इस मुकदमे की सुनवाई 5 मार्च को होगी।

Title: GAUTAM GAMBHIR v. ASHOK KUMAR/JOHN DOE & ORS

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