दिल्ली हाईकोर्ट ने एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा और कई मीडिया प्लेटफ़ॉर्म को उनके सोशल मीडिया पोस्ट के लिए फटकारा

Update: 2026-04-01 05:28 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में पत्रकार, एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा और कई मीडिया प्लेटफ़ॉर्म को उनके सोशल मीडिया पोस्ट के लिए फटकारा। इन पोस्ट में एक व्यक्ति पर फ़्लाइट के अंदर हुई घटना के दौरान यौन उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए उसे "छेड़छाड़ करने वाला" (Molester) बताया गया।

जस्टिस विकास महाजन ने कहा कि मीडिया हाउस और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म द्वारा बनाई गई कहानियों ने साफ़ तौर पर FIR की सीमाओं का उल्लंघन किया। उन्होंने कहा कि इन प्रकाशनों ने न केवल FIR में लगाए गए आरोपों की रिपोर्ट की, बल्कि मामले पर समय से पहले ही अपना फ़ैसला भी सुना दिया।

कोर्ट ने "परदाफ़ाश मीडिया" के प्लेटफ़ॉर्म पर प्रकाशित पोस्ट पर सख़्त आपत्ति जताई। कोर्ट ने इसे "सोशल मीडिया का सबसे ज़्यादा आपत्तिजनक और बेवजह इस्तेमाल" बताया, जिसका मक़सद मामले के तथ्यों की पुष्टि किए बिना ही किसी मुद्दे को सनसनीखेज़ बनाना था।

कोर्ट ने कहा,

"सवाल में मौजूद पोस्ट में वादी (Plaintiff) को 'छेड़छाड़ करने वाला' बताया गया। यह शब्द उसकी तस्वीर के ठीक ऊपर बड़े अक्षरों में लिखा गया, जिसमें उसका और उसके एम्प्लॉयर का नाम भी शामिल है। पहली नज़र में यह ऑनलाइन मानहानि का मामला बनता है, जिससे वादी को सार्वजनिक उपहास और उसकी प्रतिष्ठा को नुक़सान पहुंच सकता है।"

जज एक मानहानि के मुक़दमे की सुनवाई कर रहे थे, जिसे उस व्यक्ति ने एक स्वतंत्र पत्रकार, X Corp, OBNews, Google LLC, Meta Platforms, NDTV Hindi, ABP Live, ऋचा चड्ढा और Indigo Airlines के ख़िलाफ़ दायर किया।

यह विवाद 11 मार्च को दिल्ली-मुंबई Indigo फ़्लाइट में हुई एक घटना से जुड़ा है। इस घटना के दौरान, एक महिला स्वतंत्र पत्रकार (पहली प्रतिवादी) ने वादी पर फ़्लाइट के बीच में ही अनुचित व्यवहार करने का आरोप लगाया।

शिकायत के अनुसार, वादी ने सभी आरोपों से इनकार किया और दावा किया कि वह पूरी यात्रा के दौरान अपनी सीट पर ही बैठा रहा और फ़्लाइट उतरने से पहले सो रहा था।

यह विवाद तब और बढ़ गया, जब पत्रकार ने X (पहले Twitter) पर आरोप पोस्ट किए। उसने FIR दर्ज होने से पहले ही वादी की पहचान, तस्वीर और उसके काम से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की थी।

इसके बाद इस पोस्ट को कई मीडिया प्लेटफ़ॉर्म और जानी-मानी हस्तियों ने और ज़्यादा फैलाया। इनमें एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा भी शामिल थीं, जिन्होंने इस कंटेंट को दोबारा पोस्ट करते हुए लिखा, "इसे मशहूर बनाओ।"

कोर्ट ने वादी के पक्ष में एक अंतरिम आदेश जारी किया। कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट और समाचार रिपोर्टों ने वादी को "समय से पहले ही दोषी" ठहरा दिया, जिससे उसकी प्रतिष्ठा और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन हुआ।

अदालत ने कहा,

“मौजूदा मामले के संदर्भ में, जब वादी के खिलाफ पहले ही FIR दर्ज हो चुकी है। जांच चल रही है तो प्रतिवादियों को FIR की सामग्री या ऐसी जानकारी साझा करने या फैलाने का अधिकार हो सकता है जो सूचनात्मक हो और जनहित में हो। हालांकि, साथ ही प्रतिवादियों को संयम बरतना होगा और वादी के चरित्र से जुड़ी ऐसी कोई भी सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने से बचना होगा, जिससे उसके प्रति पूर्वाग्रह का माहौल बने, उसकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचे। इस प्रकार चल रही जांच पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।”

कोर्ट ने यह बात नोट की कि महिला पत्रकार ने आपराधिक कानून की प्रक्रिया शुरू करने से पहले ही सार्वजनिक सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर आरोप लगाना शुरू कर दिया था; उसने यह घटना सुबह लगभग 09:39 बजे सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी, जबकि FIR दोपहर 12:27 बजे दर्ज की गई।

कोर्ट ने कहा,

“इतनी जल्दबाज़ी में सार्वजनिक तौर पर जानकारी ज़ाहिर करना, पहली नज़र में यह दिखाता है कि यह मामला सनसनी फैलाने और वादी को कानूनी राहत दिलाने की सच्ची कोशिश के बजाय जनता की राय के आधार पर वादी का 'ट्रायल' करने की एक कोशिश है। हालांकि, प्रतिवादी नंबर 1 के पास अपनी शिकायत दर्ज कराने का पूरा अधिकार है, लेकिन सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके गलत तरीके से छूने के आरोपों को फैलाना और औपचारिक जांच शुरू होने से पहले ही वादी की पहचान और उसकी तस्वीर ज़ाहिर कर देना—इस कोर्ट की पहली नज़र में—वादी के गरिमापूर्ण जीवन जीने और निष्पक्ष सुनवाई के मौलिक अधिकार का गंभीर उल्लंघन है।”

चड्ढा की भूमिका के बारे में कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जिन लोगों का जनता पर गहरा असर होता है, उनकी ज़िम्मेदारी भी ज़्यादा होती है। कोर्ट ने कहा कि चड्ढा यकीनन एक जानी-मानी हस्ती हैं, जिनकी डिजिटल दुनिया में बहुत बड़ी मौजूदगी है।

कोर्ट ने कहा,

“बिना जांच-पड़ताल वाले आरोप का समर्थन करना और उसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना—साथ ही उसके साथ 'इसे मशहूर बनाओ' जैसा भड़काऊ संदेश लिखना—सिर्फ़ 'अभिव्यक्ति की आज़ादी' तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि यह किसी को सार्वजनिक तौर पर शर्मिंदा करने और डिजिटल दुनिया में 'भीड़ की मनमानी' (Digital Vigilantism) को बढ़ावा देने का काम करता है। प्रतिवादी नंबर 7 जैसी जानी-मानी हस्ती की यह कानूनी और नैतिक ज़िम्मेदारी बनती है कि वह अपने प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल करके किसी पर गंभीर आरोप लगाने से पहले उन आरोपों की सच्चाई की जांच-पड़ताल ज़रूर करे। कोर्ट की पहली नज़र में यह बात सामने आई कि बिना जांच-पड़ताल वाले आरोपों का समर्थन करने से वादी की इज़्ज़त-शोहरत को तुरंत बहुत ज़्यादा और ऐसा नुकसान पहुंचा है, जिसकी भरपाई नहीं हो सकती। हालांकि, कोर्ट को मिस्टर खुराना द्वारा दी गई इस जानकारी का भी ध्यान है कि प्रतिवादी नंबर 7 ने अपना वह ट्वीट हटा लिया है; और कोर्ट को उम्मीद है कि प्रतिवादी नंबर 7 भविष्य में इस तरह के मामलों को और ज़्यादा नहीं बढ़ाएगी।”

इसलिए कोर्ट ने स्वतंत्र पत्रकार, OBNews और Pardafaash Media को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई की तारीख तक वे वादी के ख़िलाफ़ ऐसे कोई भी पोस्ट प्रकाशित न करें जिनमें पहले जैसे या मिलते-जुलते मानहानिकारक आरोप लगाए गए हों।

कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म को भी निर्देश दिया कि वे प्रतिवादियों द्वारा प्रकाशित किए गए मानहानिकारक पोस्ट को हटा दें—जिनमें चड्ढा द्वारा दोबारा पोस्ट की गई सामग्री भी शामिल है—अगर उन्हें अभी तक नहीं हटाया गया।

Title: MR. NIDISH GOPALKRISHNAN NAIR v. X & ORS

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