Delhi Riots: नताशा नरवाल नहीं मिली एकेडमिक कॉन्फ्रेंस के लिए UK जाने की इजाज़त
दिल्ली कोर्ट ने दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश के मामले में आरोपी नताशा नरवाल को एकेडमिक कॉन्फ्रेंस और रिसर्च के काम के लिए यूनाइटेड किंगडम (UK) जाने की इजाज़त देने से इनकार किया।
कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिशनल सेशंस जज समीर बाजपेयी ने कहा कि विदेश यात्रा का अधिकार पूरी तरह से नहीं मिलता है और गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत कार्यवाही का लंबित होना एक अहम बात है।
कोर्ट ने नरवाल की उस अर्ज़ी को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने 2 नवंबर से 1 दिसंबर तक UK जाने की इजाज़त मांगी थी।
जज ने कहा कि मामले में अभी आरोप तय होने पर विचार किया जा रहा है और जिन अपराधों के लिए नरवाल के खिलाफ UAPA के तहत चार्जशीट दाखिल की गई है, उनमें उम्रकैद और कुछ मामलों में मौत की सज़ा भी हो सकती है।
कोर्ट ने कहा,
"हालांकि किसी आपराधिक मामले के लंबित होने का मतलब यह नहीं है कि आरोपी कभी विदेश नहीं जा सकता, लेकिन कोर्ट को मामले की प्रकृति और कुल हालात को ज़रूर देखना चाहिए।"
कोर्ट ने आगे कहा कि मामले की गंभीरता और कार्यवाही के चरण को देखते हुए, नरवाल को विदेश जाने की इजाज़त देना सही नहीं है।
नरवाल ने लंदन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज़ (SOAS) में 5 से 8 नवंबर तक होने वाली 23वीं सालाना हिस्टोरिकल मैटेरियलिज़्म कॉन्फ्रेंस में रिसर्च पेपर पेश करने के लिए UK जाने की इजाज़त मांगी थी।
उनके पेपर का शीर्षक "जेंडरड कार्सरल लेबर एज़ सोशल रिप्रोडक्शन" (Gendered Carceral Labour as Social Reproduction) है।
उन्होंने कहा कि यह कॉन्फ्रेंस एक अहम एकेडमिक मौका है और वह वारविक यूनिवर्सिटी भी जाना चाहती हैं, जहाँ वह 2023 से "भारत में जेंडर और कार्सरल लेबर" (Gender and Carceral Labour in India) पर PhD कर रही हैं। उन्होंने ब्रिटिश लाइब्रेरी में आर्काइवल रिसर्च करने का भी प्रस्ताव रखा।
नरवाल ने बताया कि कॉन्फ्रेंस में व्यक्तिगत रूप से शामिल होना ज़रूरी था और उन्हें अपने पेपर के लिए निमंत्रण और स्वीकृति मिल गई।
उन्होंने आगे कहा कि वह नियमित रूप से कोर्ट की कार्यवाही में शामिल होती रही हैं, ज़मानत की सभी शर्तों का पालन किया और उनके भागने का कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर अर्ज़ी नामंज़ूर हो जाती है तो उन्हें आर्थिक नुकसान हो सकता है, इसलिए वह कोर्ट से मंज़ूरी मिलने के बाद ही अपने हवाई टिकट बुक करेंगी।
अभियोजन पक्ष ने अर्ज़ी का विरोध करते हुए कहा कि यह मामला दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के पीछे की कथित बड़ी साज़िश से जुड़ा है, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई और सैकड़ों लोग घायल हुए।
स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने दलील दी कि नरवाल के खिलाफ UAPA के प्रावधान लागू किए गए थे और मामला एक अहम चरण में है, जिसमें आरोप तय करने का सवाल अभी भी विचाराधीन है।
दिल्ली पुलिस ने जून 2021 में ज़मानत देते समय दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई शर्त का भी हवाला दिया, जिसके तहत उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना था और विदेश यात्रा करने से पहले कोर्ट से पूर्व मंज़ूरी लेनी थी।
पुलिस ने यह आशंका भी जताई कि नरवाल यूके में शरण ले सकती हैं और भारत वापस नहीं लौटेंगी। अभियोजन पक्ष ने कन्फर्म ट्रैवल बुकिंग न होने पर भी सवाल उठाए और उनके पीएचडी एडमिशन से जुड़े दस्तावेज़ों के सत्यापन को लेकर चिंता जताई।
नरवाल के वकील ने उनके भारत वापस न लौटने की आशंका को खारिज करते हुए कहा कि उनके वकील उनका प्रतिनिधित्व करते रहेंगे और वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए कोर्ट की कार्यवाही में शामिल हो सकती हैं।
6 अक्टूबर को पारित अपने आदेश में जज बाजपेयी ने कहा कि इस मामले में FIR 2020 में दर्ज की गई थी, जबकि नरवाल ने कार्यवाही लंबित रहने के दौरान 2023 में वारविक यूनिवर्सिटी में अपनी पीएचडी शुरू की थी।
कोर्ट ने माना कि दिल्ली हाई कोर्ट ने ज़मानत देते समय उन्हें विदेश यात्रा के लिए ट्रायल कोर्ट से मंज़ूरी लेने की अनुमति दी थी। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करने का भी निर्देश दिया था, यदि वह पहले ही जारी किया जा चुका हो।
कोर्ट ने कहा,
"इसके अलावा, याचिकाकर्ता के वकील ने जिन फैसलों का ज़िक्र किया है, उनके संदर्भ में यह कहा जा सकता है कि विदेश यात्रा का अधिकार कोई पूर्ण अधिकार नहीं है, बल्कि यह कुछ अपवादों के अधीन है। UAPA के प्रावधानों के तहत मौजूदा मामले का लंबित होना शायद सबसे महत्वपूर्ण अपवाद है।"
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी आपराधिक मामले के लंबित होने मात्र से ही आरोपी विदेश यात्रा के अधिकार से वंचित नहीं हो जाता, बल्कि आरोपों की प्रकृति और समग्र परिस्थितियों की जांच की जानी चाहिए।
यह मानते हुए कि कार्यवाही के चरण और अपराधों की गंभीरता विदेश यात्रा की अनुमति देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं थे, कोर्ट ने याचिका खारिज की।
बता दें, नरवाल ने दिल्ली दंगों के एक अन्य मामले में भी इसी तरह की याचिका दायर की थी, जिसे जज बाजपेयी ने खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि हालांकि किसी आपराधिक मामले के लंबित होने का मतलब यह नहीं है कि आरोपी कभी विदेश यात्रा नहीं कर सकता, लेकिन कोर्ट को निश्चित रूप से मामले की प्रकृति और समग्र परिस्थितियों पर विचार करना चाहिए।
नरवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में दोनों आदेशों को चुनौती दी है, जिन पर कल सुनवाई होनी है। जहां UAPA मामले के आदेश के खिलाफ चुनौती जस्टिस अमित बंसल के समक्ष सूचीबद्ध है, वहीं दूसरे आदेश के खिलाफ चुनौती पर जस्टिस गिरीश कठपालिया सुनवाई करेंगे।