हाईकोर्ट ने यमुना के बाढ़ वाले इलाकों के 'ज़ोन O' में नए निर्माण के खिलाफ चेतावनी दी

Update: 2026-05-26 14:18 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि दिल्ली में यमुना के बाढ़ वाले इलाकों में बनी रिहायशी कॉलोनियां, जिन्हें 'ज़ोन O' में रखा गया है, “पूरी तरह से मना” हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस इलाके की 91 गैर-कानूनी कॉलोनियों को 'नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ़ दिल्ली लॉज़ (स्पेशल प्रोविज़न्स) सेकंड एक्ट, 2011' के तहत 31 दिसंबर, 2026 तक दंडात्मक कार्रवाई से अस्थायी सुरक्षा मिली हुई है।

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की डिवीज़न बेंच ने इस पर्यावरण के लिहाज़ से संवेदनशील इलाके में लगातार हो रहे गैर-कानूनी निर्माण पर चिंता जताई और चेतावनी दी कि नए गैर-कानूनी ढांचे बनाने की इजाज़त देने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

कोर्ट ने आदेश दिया,

“यह साफ है कि MCD के इंजीनियरों की सीधी देखरेख में ही 'ज़ोन O' में गैर-कानूनी निर्माण हो रहा है, जो बिल्कुल नया है। इसलिए 'ज़ोन O' में आने वाले इन इलाकों के संबंधित एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों के नाम अगली सुनवाई पर कोर्ट के सामने पेश किए जाएं और ये एग्जीक्यूटिव इंजीनियर अगली सुनवाई पर खुद भी मौजूद रहें।”

यह मामला 'ज़ोन O' में बड़े पैमाने पर हो रहे गैर-कानूनी निर्माण और कब्ज़ों से जुड़ा है, जो राष्ट्रीय राजधानी में यमुना के बाढ़ वाले इलाकों का हिस्सा है।

कोर्ट ने कहा कि हालांकि 'ज़ोन O' की कॉलोनियों को अभी तक नियमित नहीं किया गया, लेकिन वहां रहने वालों को फिलहाल 2026 के आखिर तक दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा मिली हुई है।

केंद्र सरकार का पक्ष साफ करते हुए आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने एक हलफनामे के ज़रिए कोर्ट को बताया कि 'स्पेशल प्रोविज़न्स एक्ट' के तहत मिली अस्थायी सुरक्षा 'ज़ोन O' में मौजूद गैर-कानूनी कॉलोनियों पर भी लागू होती है। हालांकि, इन कॉलोनियों में रहने वालों को मालिकाना हक नहीं दिया जा रहा है।

कोर्ट को बताया गया कि इन 91 कॉलोनियों में करीब 5-6 लाख लोग रहते हैं, यानी लगभग एक लाख घर हैं। इस इलाके के पुनर्वास और भविष्य की योजनाओं को लेकर केंद्र सरकार, GNCTD और दूसरी एजेंसियों के बीच बातचीत चल रही है।

इसके साथ ही बेंच ने इस बात पर ज़ोर दिया कि बाढ़ वाले इलाके में किसी भी नए निर्माण की इजाज़त नहीं दी जा सकती। इसने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को निर्देश दिया कि वह यह सुनिश्चित करे कि ज़ोन 'O' में कोई भी नया निर्माण न हो, "भले ही वह मरम्मत या नवीनीकरण की आड़ में किया जा रहा हो।"

अदालत ने उन स्टेटस रिपोर्ट और तस्वीरों का भी संज्ञान लिया, जिनमें जगतपुर गाँव, वज़ीराबाद, राम घाट और न्यू अरुणा नगर (मजनू का टीला) जैसे इलाकों में नए अनाधिकृत निर्माण दिखाए गए।

इसने MoHUA, MCD और DDA के अधिकारियों को 8 जून को एक बैठक करने और ज़ोन 'O' में नए अतिक्रमणों को रोकने तथा अवैध निर्माणों को गिराने के लिए उठाए गए कदमों का विस्तृत विवरण देते हुए एक 'कार्यवाही रिपोर्ट' (Action Taken Report) रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया।

Case title: Vijay Kumar Diwakar v. SDMC

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