कथित हेट स्पीच पर FIR की मांग वाली हर्ष मंदर की याचिका पर दिल्ली कोर्ट ने असम सीएम से जवाब मांगा

Update: 2026-05-27 05:13 GMT

दिल्ली कोर्ट ने एक्टिविस्ट हर्ष मंदर की याचिका पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से जवाब मांगा। इस याचिका में मंदर ने कथित हेट स्पीच के मामले में सरमा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की।

साकेत कोर्ट की एडिशनल सेशंस जज सोनू अग्निहोत्री ने मंदर की रिवीजन याचिका पर नोटिस जारी करते हुए दिल्ली पुलिस से भी जवाब मांगा।

मंदर ने BJP नेता के खिलाफ BNS के उन प्रावधानों के तहत FIR दर्ज करने की मांग की, जो दुश्मनी बढ़ाने, सार्वजनिक अशांति फैलाने वाले बयान देने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से किए गए कामों से जुड़े अपराधों से संबंधित हैं।

शिकायत में सरमा के सार्वजनिक बयानों की एक श्रृंखला का ज़िक्र है, जिसमें उन्होंने लोगों से "मियों को परेशान करने" का आग्रह किया था और दावा किया था कि विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया के दौरान चार से पांच लाख "मिया" वोटरों को वोटर लिस्ट से हटा दिया जाएगा।

जुडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास ने 20 अप्रैल को मंदर की याचिका खारिज की थी और क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र (Territorial Jurisdiction) की कमी का हवाला देते हुए FIR दर्ज करने का निर्देश देने से इनकार किया था। कोर्ट ने यह भी पाया था कि मंदर रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत पेश करने में नाकाम रहे, जिससे यह साबित हो सके कि कथित टिप्पणियों के कारण कोर्ट के अधिकार क्षेत्र के भीतर कोई दुश्मनी, वैमनस्य या उकसावा पैदा हुआ हो।

मंगलवार को मंदर की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 175(3) के तहत दायर आवेदन को इस आधार पर गलत तरीके से खारिज किया था कि "कोर्ट के अधिकार क्षेत्र के भीतर कुछ भी नहीं हुआ।"

वकील ने आगे कहा कि BNSS की धारा 173(1) किसी संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) के होने से संबंधित जानकारी किसी भी पुलिस स्टेशन को देने की अनुमति देती है, "भले ही वह अपराध किसी भी क्षेत्र में हुआ हो।" इसके लिए उन्होंने 'ज़ीरो FIR' की अवधारणा का हवाला दिया।

इसके अलावा, ज़ीरो FIR और E-FIR के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी की गई 'स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर' (SOP) का भी ज़िक्र किया गया, जिसे रिवीजन याचिका के साथ रिकॉर्ड पर रखा गया था।

कोर्ट ने कहा,

"याचिकाकर्ता के वकील द्वारा दी गई दलीलों को देखते हुए प्रतिवादियों को रिवीजन याचिका का नोटिस जारी किया जाए। इसके लिए उचित PF/स्पीड पोस्ट जमा करने के बाद 15.07.2026 की तारीख तय की जाती है।"

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