शिपमेंट वाहन में प्रतिबंधित पदार्थ: कर्नाटक हाईकोर्ट ने एनडीपीएस मामले में लॉजिस्टिक कंपनी के कर्मचारियों को राहत दी

Update: 2022-10-19 10:20 GMT

कर्नाटक हाईकोर्ट ने लॉजिस्टिक कंपनी के दो अधिकारियों के खिलाफ नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (एनडीपीएस एक्ट)के तहत लंबित कार्यवाही को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि वे इस बात से अनजान थे कि परिवहन वाहन का चालक प्रतिबंधित पदार्थ ले जा रहा है।

जस्टिस पी एन देसाई की एकल पीठ ने नाइटको लॉजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधक और एमडी द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया।

पीठ ने कहा,

"आरोप पत्र सामग्री इन याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आरोप, चालक का बयान, पंचनामा की सामग्री और ऊपर उल्लिखित धाराएं इन सबसे यह स्पष्ट है कि इन याचिकाकर्ताओं पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, क्योंकि उनका उक्त कथित अपराध से कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए उनके खिलाफ कार्यवाही जारी रखना कानून और न्यायालय की प्रक्रिया के दुरुपयोग के अलावा और कुछ नहीं है।"

गुप्त सूचना मिलने पर आबकारी निरीक्षक ने कंपनी के शिपमेंट वाहन को रोका तो चालक की सीट के पीछे खाद की बोरियों में प्रतिबंधित (500 ग्राम पोस्ता भूसा पाउडर) मिला। आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया और कहा कि पाउडर और वाहन को जब्त कर लिया गया। पुलिस ने शिकायत दर्ज की और जांच पूरी करने के बाद चालक के साथ-साथ याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया।

पीठ ने कहा कि यह दिखाने के लिए कुछ भी नहीं है कि ये याचिकाकर्ता या तो उक्त लॉजिस्टिक के मालिकों को जानते हैं या उन्होंने जानबूझकर ड्राइवर को इस तरह के प्रतिबंधित पदार्थ के परिवहन की अनुमति दी है।

पीठ ने यह भी कहा,

"जब आरोपी नंबर एक चालक ने खुद कहा कि वाहन के मालिक या माल के मालिक यह नहीं जानते कि वह उक्त प्रतिबंधित पदार्थ का परिवहन कर रहा है तो इन याचिकाकर्ताओं पर मुकदमा चलाने का सवाल ही नहीं उठता।"

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि वाहन में लोड किए गए सामान सभी सहायक चालान के अनुसार हैं और शिपमेंट कंटेनर से कुछ भी बरामद नहीं किया गया, जो लोडिंग के बाद बंद हो जाता है और केवल एक बार लॉक पासवर्ड देकर अनलोडिंग के स्थान पर खोला जाता है। चालक के केबिन से मादक पदार्थ बरामद किया गया और उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं थी।

दूसरी ओर राज्य ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ताओं को जानकारी थी या नहीं, यह ट्रायल के समय साबित किया जाना है, इस स्तर पर नहीं।

केस टाइटल: सुनील कुमार कौशिक और एएनआर बनाम कर्नाटक राज्य

केस नंबर: आपराधिक याचिका नंबर 201054/2022

साइटेशन: लाइव लॉ (कर) 416/2022

आदेश की तिथि: 21 सितंबर, 2022

उपस्थिति: शिंदे गीता रामकृष्ण, याचिकाकर्ताओं के वकील; प्रतिवादी के लिए गुरुराज वी. हसीलकर, एचसीजीपी

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