राज्य में विलुप्तप्राय प्रजाति के पक्षियों की अवैध तस्करी और व्यापार के मामले पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया

Update: 2020-12-06 06:58 GMT

Calcutta High Court

कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य में पक्षियों की विलुप्तप्राय प्रजातियों की अवैध तस्करी और व्यापार के मामले में स्वत संज्ञान लिया है।

मुख्य न्यायाधीश थोथाथिल बी राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की एक खंडपीठ ने एक समाचार पत्र की रिपोर्ट के आधार पर यह मामला उठाया है। इस रिपोर्ट में पक्षियों के जीवन में 'क्रूर घुसपैठ' के संबंध में 'छोटा सा पर्दाफाश' किया गया है।

इस मामले में बेंच ने निम्नलिखित मुद्दों को संबोधित करने का निर्णय लिया हैः

-पक्षियों की विलुप्तप्राय प्रजातियों की तस्करी और अवैध व्यापार।

-पक्षियों की विलुप्तप्राय प्रजातियों की ऐसी तस्करी और अवैध व्यापार के लिए जिम्मेदारी तय करना।

-उपयुक्त अधिकारियों को आवश्यक निर्देश पारित करने के लिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सकें कि पक्षियों की विलुप्तप्राय प्रजातियों की तस्करी और अवैध व्यापार न हो,

अदालत को सूचित किया गया था कि टिया, मोयना, चंदना और पहाड़ी मोयना जैसे विलुप्तप्राय पक्षी उत्तरी बंगाल, झारखंड, बिहार से तस्करी किए जाते हैं और कोलकाता और दिल्ली जैसे शहरों में इनका व्यापार किया जा रहा है, खासकर सर्दियों के दौरान।

किस तरह से इन पक्षियों को पकड़ा जाता है,उसका दर्दनाक विवरण देते हुए न्यायालय के समक्ष हाईकोर्ट रजिस्ट्रार जनरल की तरफ से पेश वकील सैकत बनर्जी ने बताया किः

''पक्षियों की एक चैंका देने वाली संख्या का भयावह परिस्थितियों में विभिन्न स्थानों पर क्रूरता से तस्करी की जा रही है। पक्षियों की तस्करी की जाती और इस दौरान सूटकेस, पीवीसी पाइपों की पाइपिंग में उनका दम घुट जाता है। उनको मोजों में भर ले जाते हैं, जूते में ड़ाल देते हैं,जिससे उनकी चोंच बंद हो जाती है। जंगली तोतों को पकड़ने के लिए शिकारी उनमें से दो को चारे के रूप में उपयोग करते हैं और उनकी आंखों में पंचर कर देते हैं। इन अंधे और घायल पक्षियों को फिर एक चादर पर छोड़ दिया जाता है, जहां वे मदद के लिए चिल्लाते हैं। जैसे ही सैकड़ों पक्षी मदद के लिए आएंगे और वे उतरते हैं,उसी समय शिकारी उनके ऊपर एक चादर फेंक देते हैं और उन्हें पकड़ लेते हैं।''

उन्होंने यह भी कहा कि मंगलवार (1 दिसंबर) को ही, दुर्गापुर एक्सप्रेसवे पर एक बस से 300 से अधिक टिया और कम से कम 25 पहाड़ी मोयना पक्षियों को वन अधिकारियों ने बरामद किया था।

उपरोक्त के मद्देनजर, बेंच इस बात से आश्वस्त थी कि ''हथियारों का उपयोग करके बड़े पैमाने पर पक्षियों को पकड़ना और कानून के तहत अनुमेय से परे पक्षियों को कैद करना भी स्पष्ट रूप से इस स्वत संज्ञान याचिका में प्रदर्शित किया गया है।''

पीठ ने 14 संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं (उत्तरदाताओं का विवरण आदेश में उपलब्ध नहीं है)।

सुनवाई के दौरान, वकील ने कहा कि इस मुद्दे से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए, भारत के संविधान की अनुसूची VII, सूची III (समवर्ती सूची),प्रविष्टि 17बी के प्रावधानों का सहारा लिया जा सकता है, जो जंगली जानवर और पक्षियों के संरक्षण की बारे में बताते हैं।

इसके अलावा, उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 48 ए और 51 ए (जी) भी वनों और वन्य जीवन को बेहतर बनाने और उनके सरंक्षण के बारे में बताता है।

उन्होंने वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972 का भी उल्लेख किया, जिसे संसद द्वारा पशुओं, पक्षियों, पौधों और उनसे जुड़े मामलों के संरक्षण के उद्देश्य से लागू किया गया था।

बेंच ने कहा कि मामले के महत्व और उत्पन्न हुई आकस्मिक स्थितियों को देखते हुए इससेे तत्काल आधार पर निपटा जाएगा।

अब इसे 8 दिसंबर, 2020 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

केस का शीर्षकः In re : पक्षियों की विलुप्तप्राय प्रजातियों की तस्करी और अवैध व्यापार

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