भीमा कोरेगांव के आरोपी को बुलाने पर मुंबई प्रेस क्लब ने पत्रकार को किया बाहर, हाईकोर्ट ने सही ठहराया फैसला

Update: 2026-05-23 14:55 GMT

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार (22 मई) को ट्रायल के आदेश पर रोक लगाी, जिसमें सीनियर पत्रकार गुरबीर सिंह को मुंबई प्रेस क्लब (MPC) से निकाले जाने पर रोक लगाई गई थी। गुरबीर सिंह पर आरोप था कि उन्होंने एक ऐसा कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें भीमा कोरेगांव - एल्गार परिषद मामले में नामजद आठ आरोपी शामिल हुए थे।

ऐसा करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में व्यापक अंतरिम राहत देने के कारणों का खुलासा नहीं किया था और "वास्तव में अंतिम राहत ही दे दी थी"।

जस्टिस गौतम अंखड की अवकाश पीठ ने सिविल कोर्ट के 7 मई के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसमें सिंह को राहत दी गई थी। इस आदेश में MPC से उनके निष्कासन पर रोक लगाई गई और उन्हें जुलाई में होने वाले क्लब के चुनावों में लड़ने की अनुमति दी गई।

जस्टिस अंखड ने कहा,

"मेरी प्रथम दृष्टया राय में विवादित आदेश में ऐसे कोई कारण नहीं बताए गए, जो इतनी व्यापक अंतरिम राहत देने को उचित ठहराते हों। ट्रायल कोर्ट ने माना था कि: (i) प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ है; (ii) सिंह को जिरह का अवसर नहीं दिया गया; (iii) निष्कासन का उद्देश्य सिंह को क्लब चुनाव लड़ने से रोकना था; और (iv) यदि अंतरिम सुरक्षा नहीं दी जाती है तो सिंह को चुनाव लड़ने का अवसर नहीं मिलेगा। मेरी राय में विवादित आदेश न तो रिकॉर्ड पर रखे गए तथ्यों का विश्लेषण करता है और न ही उपरोक्त निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए कोई कारण या आधार बताता है।"

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सिंह और अन्य सदस्यों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, उनके जवाब दाखिल किए गए और तीन सदस्यीय जांच समिति के समक्ष व्यक्तिगत सुनवाई भी की गई।

कोर्ट ने कहा कि जांच समिति की रिपोर्ट में यह दर्ज है कि कुछ घटनाओं के कारण आगे किसी व्यक्तिगत सुनवाई की आवश्यकता नहीं थी।

जस्टिस अंखड़ ने फ़ैसला सुनाया,

"ट्रायल कोर्ट सिर्फ़ यह नहीं कह सकता था कि नैचुरल जस्टिस के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ, बिना उसमें दर्ज घटनाओं पर चर्चा किए। इसके बाद रिपोर्ट को मैनेजिंग कमिटी के दो-तिहाई बहुमत से मंज़ूरी मिल गई। ट्रायल कोर्ट पूरे डिसिप्लिनरी प्रोसेस पर रोक नहीं लगा सकता, जब तक कि वह ऐसे कारण दर्ज न करे जिनसे साफ़ तौर पर कोई गैर-कानूनी काम या निष्पक्ष सुनवाई से पूरी तरह इनकार ज़ाहिर न होता हो।

मेरी शुरुआती राय में, जिस आदेश को चुनौती दी गई है, वह भी अंतरिम सुरक्षा के सीमित दायरे से काफ़ी आगे निकल गया। शो-कॉज़ नोटिस, जांच रिपोर्ट और मैनेजिंग कमिटी के प्रस्ताव के असर, लागू होने और नतीजों पर रोक लगाकर और आगे यह निर्देश देकर कि सिंह को क्लब के चुनाव लड़ने की इजाज़त है, ट्रायल कोर्ट ने असल में अंतिम राहत दी।"

इन टिप्पणियों के साथ बेंच ने राय दी कि MPC ने पहली नज़र में एक मज़बूत मामला बनाया कि जिस आदेश को चुनौती दी गई है, वह गलत है और ट्रायल कोर्ट द्वारा इस्तेमाल किया गया विवेक सही नहीं है।

खास बात यह है कि भीमा कोरेगांव मामले के आरोपी - वरवर राव, वर्नन गोंसाल्वेस, अरुण फ़रेरा, गौतम नवलखा, आनंद तेलतुंबडे, हनी बाबू, रोना विल्सन और सुधीर धवले - जो सभी ज़मानत पर बाहर हैं, इस साल 19 जनवरी को MPC की छत पर आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए। इस कार्यक्रम का आयोजन सिंह ने किया था और ख़बरों के मुताबिक, इसका मकसद भीमा कोरेगांव - एल्गार परिषद मामले के "कानूनी मुद्दों पर चर्चा" करना था।

इस मामले में सभी 15 आरोपियों पर स्पेशल कोर्ट द्वारा लगाई गई ज़मानत की शर्तों में से एक यह है कि वे आपस में बातचीत नहीं करेंगे। हालांकि, आठ आरोपियों ने, जो कथित तौर पर 19 जनवरी, 2026 को MPC में सिंह के कार्यक्रम में एक साथ शामिल हुए, इसी शर्त का उल्लंघन किया।

इसके बाद MPC की मैनेजिंग कमिटी को एक सदस्य से शिकायत मिली और उसी के मुताबिक, तीन सदस्यों वाली एक जांच कमिटी बनाई गई। इस कमिटी ने सिंह की बात सुनने के बाद कार्यक्रम आयोजित करने और आरोपियों को बुलाने के उनके आचरण के लिए उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की सिफ़ारिश की। कमिटी का मानना ​​था कि इस आचरण से क्लब की 'बदनामी' हुई, क्योंकि इससे यह संदेश जा सकता था कि क्लब गंभीर अपराधों के आरोपियों से जुड़ा हुआ है। इसलिए मैनेजिंग कमिटी ने अपने नियमों के अनुसार, 26 अप्रैल 2026 को सिंह को छह साल के लिए चुनाव लड़ने से बाहर करने का फ़ैसला किया। सिंह ने एक मुक़दमे के ज़रिए सिविल कोर्ट में इस फ़ैसले को चुनौती दी। 7 मई को सिविल कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए MPC को निर्देश दिया कि वह सिंह को क्लब के आने वाले चुनाव लड़ने की अनुमति दे, जो इस साल जुलाई में होने की संभावना है।

इस आदेश को चुनौती देते हुए MPC ने अपने सेक्रेटरी मयूरेश गणपतये के ज़रिए अपील दायर की। यह अपील शुरू में जस्टिस संदेश पाटिल की बेंच के सामने लिस्ट की गई, जो उस समय वेकेशन कोर्ट की अध्यक्षता कर रहे थे, लेकिन उन्होंने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।

इसके बाद यह मामला जस्टिस गौतम अंखड़ के सामने लिस्ट किया गया। उन्होंने यह माना कि एक अंतरिम आदेश के ज़रिए सिंह के निष्कासन पर रोक लगाकर सिविल कोर्ट ने उन्हें उनकी अंतिम मांग ही पूरी की।

हाईकोर्ट ने इस मामले में अंतिम बहस के लिए 15 जून की तारीख तय की।

Case Title: Mumbai Press Club vs Gurbir Singh [Appeal From Order (Stamp) 14796 of 2026]

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