राजस्थान बार काउंसिल चुनाव: एडवोकेट जनरल की निगरानी पर BCI का नोटिस 'हस्तक्षेप'—इलेक्शन कमेटी

Update: 2026-02-26 10:37 GMT

बार काउंसिल ऑफ राजस्थान (BCR) के चुनाव की निगरानी कर रही हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी ने राज्य बार निकाय के कार्यों की निगरानी के लिए एडवोकेट जनरल की नियुक्ति पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा जारी शो-कॉज नोटिस को “हस्तक्षेप” करार दिया है।

कमेटी ने BCI के नोटिस को “अमान्य” बताते हुए BCR के कार्यवाहक सचिव को उसका जवाब न देने का निर्देश दिया।

सेवानिवृत्त दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस जे.आर. मिधा की अध्यक्षता वाली कमेटी ने 24 फरवरी की बैठक की कार्यवाही में कहा कि यदि वर्तमान अध्यक्ष और सदस्य परिषद के कार्यों का संचालन करते रहे, तो निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराना संभव नहीं होगा, खासकर जब कई सदस्य स्वयं आगामी चुनाव में उम्मीदवार हैं।

कमेटी ने कहा कि BCR के अध्यक्ष तथा BCI की ओर से भेजे गए संचार कमेटी के कार्य में हस्तक्षेप हैं और राज्य में निष्पक्ष चुनाव कराने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं।

BCI का नोटिस “अमान्य”, जवाब देने की जरूरत नहीं

कमेटी ने 23 फरवरी 2026 को BCR अध्यक्ष द्वारा कार्यवाहक सचिव को दिए गए मौखिक निर्देश और उसी दिन BCI द्वारा जारी शो-कॉज नोटिस को अवैध घोषित किया। कमेटी ने स्पष्ट किया कि कार्यवाहक सचिव को BCI के नोटिस का उत्तर देने की आवश्यकता नहीं है और वे विशेष समिति के अधीन कार्य करते रहेंगे।

मॉडल आचार संहिता और एडवोकेट जनरल की भूमिका

19 फरवरी 2026 को चुनाव समिति द्वारा मॉडल आचार संहिता (MCC) लागू की गई थी, जिसके तहत निर्देश दिया गया कि नई निर्वाचित परिषद के गठन तक BCR के सभी कार्य राजस्थान के एडवोकेट जनरल की निगरानी में होंगे।

आचार संहिता जारी होने के बाद BCR अध्यक्ष ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई और कार्यवाहक सचिव को बिना अनुमति आचार संहिता प्रकाशित करने के आरोप में निलंबित करने की सूचना दी। इसके बाद BCI के प्रधान सचिव ने ई-मेल के माध्यम से शो-कॉज नोटिस जारी करते हुए कहा कि समिति को एडवोकेट जनरल को परिषद के कार्य सौंपने का अधिकार नहीं है।

कार्यवाहक सचिव ने यह पूरा मामला चुनाव समिति के समक्ष रखा।

कमेटी का कानूनी आधार

24 फरवरी 2026 की बैठक में समिति ने इन संचारों की वैधता की समीक्षा करते हुए कहा कि चुनाव कराने के लिए उसके पास सभी आवश्यक शक्तियाँ हैं, जिनमें अधिवक्ता अधिनियम के तहत मिलने वाली शक्तियाँ भी शामिल हैं।

समिति ने बताया कि अधिवक्ता अधिनियम की धारा 3(2) के अनुसार एडवोकेट जनरल बार काउंसिल के पदेन सदस्य होते हैं, जबकि धारा 8A के तहत राज्य बार काउंसिल का कार्यकाल समाप्त होने पर विशेष समिति गठित की जाती है, जिसमें एडवोकेट जनरल शामिल होते हैं।

BCR ने स्वयं 16 जनवरी 2026 को सूचित किया था कि उसका विस्तारित कार्यकाल 16 जनवरी 2024 को समाप्त हो चुका है। इसलिए समिति ने कहा कि वर्तमान सदस्य परिषद के कार्यों का संचालन करने के लिए अधिकृत नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला

समिति ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि पूरा चुनाव प्रक्रिया हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी की प्रत्यक्ष निगरानी में संचालित होगी। इसलिए चुनाव संबंधी सभी अधिकार इसी समिति के पास हैं।

समिति ने BCR अध्यक्ष और BCI के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि केवल BCI ही विशेष समिति बना सकती है। समिति के अनुसार 18 नवंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट आदेश के बाद BCI धारा 8A के तहत शक्तियों का प्रयोग नहीं कर सकती।

चुनाव में हस्तक्षेप पर अयोग्यता की चेतावनी

समिति ने कहा कि आचार संहिता लागू होने के बाद BCR अध्यक्ष और अन्य सदस्य परिषद के कार्यों का संचालन करने के लिए सक्षम नहीं हैं।

यह भी कहा गया कि यदि कोई सदस्य परिषद के मामलों में हस्तक्षेप करता है, तो उसे आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा और ऐसे सदस्य को चुनाव लड़ने, प्रस्तावक या अनुमोदक बनने से अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

कार्यवाहक सचिव और कर्मचारियों के लिए निर्देश

समिति ने कार्यवाहक सचिव को निर्देश दिया कि वे BCI के नोटिस का जवाब न दें और समिति के अधीन कार्य जारी रखें।

साथ ही BCR के सभी कर्मचारियों को निर्देश दिया गया कि नई निर्वाचित परिषद के गठन तक वे केवल समिति से निर्देश लें। किसी भी उल्लंघन को कदाचार माना जाएगा।

इस प्रकार समिति ने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करने के लिए परिषद के वर्तमान पदाधिकारियों का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं होगा।

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