इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मारे गए गैंगस्टर विकास दुबे के भाई को धोखाधड़ी मामले में दी जमानत

Update: 2022-08-30 02:43 GMT

इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मारे गए गैंगस्टर विकास दुबे के भाई दीपक दुबे को धोखाधड़ी के एक मामले में जमानत दे दी। दुबे पर आरोप है कि वह अपराध करने की नीयत से किसी और के नाम से रजिस्टर्ड सिम कार्ड का इस्तेमाल करते हुए पाया गया।

जस्टिस सिद्धार्थ की पीठ ने अपराध की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए पक्षों की ओर से दिए गए तर्क, अभियुक्त की मिलीभगत के बारे में रिकॉर्ड पर साक्ष्य और भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के जनादेश को देखते हुए ज़मानत याचिका को मंजूरी दी।

न्यायालय के समक्ष दुबे के वकील ने तर्क दिया कि उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है क्योंकि वह अपराधी विकास दुबे का भाई है और पुलिस द्वारा उसे 16 साल बाद चार मामलों में झूठा फंसाया गया।

यह तर्क दिया गया कि दुबे के खिलाफ कोई आरोप नहीं है कि उसने किसी भी अपराध के लिए अपने मोबाइल फोन नंबर का इस्तेमाल किया और न ही मोबाइल फोन के असली मालिक दया शंकर अग्निहोत्री ने दुबे के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज कराई गई।

अंत में यह तर्क दिया गया कि अपराध मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है, आवेदक जनवरी 2021 से जेल में है और मुकदमे के शीघ्र समापन की कोई संभावना नहीं है।

दूसरी ओर, राज्य की ओर से पेश एजीए ने जमानत आवेदन का विरोध करते हुए कहा कि विचाराधीन मोबाइल नंबर गैंगस्टर विकास दुबे के नौकर का है और विकास दुबे को भागने में सहायता करने के लिए आवेदक द्वारा इसका दुरुपयोग किया गया।

यह भी तर्क दिया गया कि दया शंकर अग्निहोत्री के बयान के आधार पर विशेष जांच टीम द्वारा प्रस्तुत एक विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई थी और चूंकि दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के नियम सब्सक्राइबर बदलने की अनुमति नहीं देते इसलिए, आवेदक जमानत पर रिहा होने का हकदार नहीं है।


केस टाइटल - दीपक @ दीप प्रकाश @ दीपू बनाम गृह सचिव के माध्यम से उत्तर प्रदेश राज्य। [आपराधिक विविध। जमानत आवेदन नंबर - 54178/2021]

साइटेशन : 2022 लाइव लॉ (एबी) 400

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