इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस को सीएए के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले लोगों के नाम और पते वाले होर्डिंग हटाने के निर्देश दिए

Update: 2020-03-09 09:05 GMT

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार को गंभीर झटका देते हुए, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को लखनऊ में यूपी पुलिस द्वारा लगाए गए सभी पोस्टरों और बैनरों को हटाने का आदेश दिया। इन बैनरों में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध प्रदर्शन ले दौरान हिंसा फैलाने के आरोपी व्यक्तियों के नाम और फोटो वाले बैनर लगाए थे। न्यायालय ने इन्हें हटाने का आदेश दिया।

न्यायालय ने जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस आयुक्त को 16 मार्च तक उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रविवार को एक विशेष बैठक में लखनऊ में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए‌) के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा के आरोपी व्यक्तियों की तस्वीर और विवरणों वाले बैनर लगाने के लिए राज्य सरकार के अधिकारियों की खिंचाई की ।

मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की पीठ ने कहा कि कथित सीएए प्रोटेस्टर्स के पोस्टर लगाने की राज्य की कार्रवाई "अत्यधिक अन्यायपूर्ण" है और यह संबंधित व्यक्तियों की पूर्ण स्वतंत्रता पर एक "अतिक्रमण" है।

रविवार दोपहर 3 बजे, अटार्नी जनरल (एजी) राज्य की ओर से ने हाईकोर्ट में पेश हुए। एजी ने अदालत के अधिकार क्षेत्र को यह कहते हुए विवादित बताया कि होर्डिंग्स लखनऊ में लगाए गए और इसलिए हाईकोर्ट की प्रिंसिपल बेंच को मामले में सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि कानून तोड़ने वालों की सुरक्षा के लिए जनहित याचिकाएं दायर नहीं होनी चाहिए।

19 दिसंबर, 2019 को सीएए के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा में शामिल होने पर लगभग 60 लोगों को वसूली नोटिस जारी किए गए हैं, जिनके विवरण के साथ लखनऊ प्रशासन ने शहर में प्रमुख चौराहों पर होर्डिंग्स लगाए। इस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस के खिलाफ स्वत: संज्ञान लिया।

एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि हजरतगंज क्षेत्र में मुख्य चौराहे और विधानसभा भवन के सामने सहित महत्वपूर्ण चौराहों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पोस्टर लगाए गए हैं।

अदालत ने सुबह 10 बजे की सुनवाई में कहा था कि राज्य आज दोपहर 3 बजे से पहले ऐसे सभी होर्डिंग्स हटाए और इस बारे में अदालत को 3 बजे अवगत कराए। दोपहर 3 बजे एजी अदालत में आए और कार्यवाही के बाद बेंच ने अपना फैसला सोमवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया था।

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