ओबीसी कोटा बढ़ाने के राज्य सरकार के ओर्डिनेंस पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने लगाई रोक [आर्डर पढ़े]

Update: 2019-03-27 06:13 GMT

राज्य सरकार द्वारा ओबीसी कोटा को बढ़ाने के लिए लाए गए एक ओर्डिनेंस पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने वास्तव में रोक लगा दी है।

आशिता दूबे की तरफ से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय द्विवेदी व जस्टिस रवि शंकर झाॅ की बेंच ने अपने अंतरिम आदेश में राज्य सरकार से कहा है कि कालेजों में दाखिले के लिए समय ओबीसी कैटेगरी के लिए 14 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण न दिया जाए।

गवर्नर आनंदीबेन पटेल की तरफ से जारी ओर्डिनेंस में सरकारी नौकरी व यूनिवर्सिटी में दाखिलों के लिए ओबीसी कैटगेरी के तहत दिए गए 14 प्रतिशत कोटे को बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया गया है। यह कोटा एससी के लिए दिए गए 16 प्रतिशत व एसटी के लिए दिए गए 20 प्रतिशत कोटे से अलग है।

बेंच के समक्ष दलील दी गई थी कि इस ओर्डिनेंस के तहत दिए गए कोटे के बाद कुल कोटा 63 प्रतिशत हो गया है,जो कि संविधान के तहत मान्य नहीं है। इस मामले में अब एक सप्ताह बाद सुनवाई होगी।

50 प्रतिशत का नियमःइंद्रा स्वाहनी

इंद्रा स्वाहनी केस में सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की बेंच ने बहुमत में अपना फैसला देते हुए माना था-

अनुच्छेद 16 के क्लाॅज(4) के तहत आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। 50 प्रतिशत का नियम होना चाहिए,परंतु देश के लोगों व विभिन्नताओं को देखते हुए कई विशेष परिस्थितियों पर विचार किया जाना भी जरूरी है। यह भी संभव है कि कई दूर-दराज के इलाकों में लोग जाकर बस जाते है और वह देश की मुख्य जीवनधारा से नहीं जुड़े होते है। इसलिए इस तरह के मामलों की विशेषताएं अलग होती है,जिन पर अलग तरीके से विचार किया जाना जरूरी है। इस तरह के मामलों सख्त नियमों में कुछ ढ़िलाई करनी पड़ती है। ऐसा करते समय बहुत ज्यादा चैकसी बरतनी चाहिए और विशेष केस में ही ऐसा होना चाहिए।


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