WB SIR: न्यायिक अधिकारियों पर हमले से नाराज़ सुप्रीम कोर्ट, कहा- इतना ध्रुवीकृत राज्य कभी नहीं देखा

Update: 2026-04-02 07:57 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ड्यूटी कर रहे न्यायिक अधिकारियों पर हुए हमले को लेकर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि राज्य में अत्यधिक राजनीतिक ध्रुवीकरण है और हर कोई राजनीतिक भाषा में बात करता है।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने इस मामले की तत्काल सुनवाई की जबकि यह सूचीबद्ध नहीं था। यह कदम कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के पत्र के बाद उठाया गया।

मामला मालदा जिले के एक गांव का है, जहां सात न्यायिक अधिकारियों जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल थीं को ग्रामीणों ने घेर लिया और कई घंटों तक बंधक बनाकर रखा। शाम 3:30 बजे से लेकर रात 12 बजे तक वे घिरे रहे और बाद में प्रशासन के हस्तक्षेप से उन्हें मुक्त कराया गया। इस दौरान उनके वाहनों पर पथराव और लाठियों से हमला भी किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य प्रशासन मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी, एसएसपी और जिलाधिकारीबकी कार्यप्रणाली पर गंभीर असंतोष जताया और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को निर्देश दिया कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा,

“हमने ऐसा ध्रुवीकृत राज्य कभी नहीं देखा। यहां तक कि अदालत के आदेशों के पालन में भी राजनीति झलकती है। हमने सोचा था कि न्यायिक अधिकारियों की तैनाती से एक निष्पक्ष व्यवस्था बनेगी, लेकिन उनके साथ भी ऐसा व्यवहार हो रहा है यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”

जब राज्य के महाधिवक्ता ने कहा कि निर्वाचन आयोग को प्रतिद्वंद्वी की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए तो इस पर अदालत ने सख्त प्रतिक्रिया दी।

अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि यदि प्रदर्शन गैर-राजनीतिक था तो राजनीतिक नेताओं की जिम्मेदारी बनती थी कि वे मौके पर पहुंचकर कानून-व्यवस्था बनाए रखते।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि देश के अन्य राज्यों में SIR प्रक्रिया सुचारू रूप से चली, लेकिन पश्चिम बंगाल में ही इस तरह की गंभीर घटनाएं सामने आई हैं।

अदालत की इन टिप्पणियों से स्पष्ट है कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर सर्वोच्च अदालत बेहद गंभीर है।

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