CEC के खिलाफ़ प्रदर्शनों के बीच CJI ने कहा: वकीलों और कोर्ट के स्टाफ़ की आवाजाही में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत ने सोमवार को कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शनों की वजह से राजधानी में लगी पाबंदियों के बीच वकीलों, मुक़दमेबाज़ों और कोर्ट के स्टाफ़ की आवाजाही में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए।
CJI ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इन मुद्दों में नहीं घसीटा जाना चाहिए।
CJI ने यह बात तब कही जब सीनियर वकील आत्माराम नाडकर्णी और प्रदीप राय ने वकीलों की हिरासत से जुड़ी याचिकाओं का ज़िक्र किया। जहां नाडकर्णी ने एक वकील द्वारा दायर याचिका का ज़िक्र किया, वहीं SCBA के अध्यक्ष राय ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका का ज़िक्र किया। SCBA की याचिका वकीलों की हिरासत और इंटरनेट बंद किए जाने से जुड़ी है।
CJI ने कहा कि इस मामले पर मंगलवार को सुनवाई होगी, जब इससे जुड़े दूसरे मामलों को भी लिस्ट किया जाएगा।
CJI ने टिप्पणी की,
"ये सभी लोकतांत्रिक गतिविधियाँ होनी चाहिए, लेकिन कम से कम सुप्रीम कोर्ट के कामकाज में..."
राय ने कहा,
"हम किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं हैं। यह संस्था अपने संस्थागत कर्तव्य निभा रही है और हम अपने पेशेवर कर्तव्य निभा रहे हैं। पार्टियों को हमारे काम में दखल नहीं देना चाहिए।"
जब राय ने कहा कि पार्टियों को सुप्रीम कोर्ट के कामकाज में दखल नहीं देना चाहिए तो CJI ने जवाब दिया कि उन्होंने भी प्रदर्शनकारियों से अपील की।
CJI ने कहा,
"मैंने प्रदर्शनकारियों से भी अपील की है। सभी राजनीतिक पार्टियों से भी... सुप्रीम कोर्ट को इसमें नहीं घसीटा जाना चाहिए। वकीलों, मुक़दमेबाज़ों और कोर्ट के स्टाफ़ की आवाजाही में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए। उन्हें काम करने दिया जाना चाहिए।"
राय ने जवाब दिया,
"मैंने बयान दिया कि उन्हें कोर्ट को इसमें नहीं लाना चाहिए और उन्हें ज़िम्मेदार राजनीतिक पार्टियां बनना चाहिए।"
बता दें, रविवार को CJI सूर्यकांत ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी के उस अनुरोध को ठुकरा दिया था, जिसमें उन्होंने SIR से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए बैठक करने को कहा था। CJI ने कहा था कि उन्हें न्यायिक पक्ष के ज़रिए सुप्रीम कोर्ट से संपर्क करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन ने भी वकीलों के खिलाफ़ पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की है। रविवार को हुई एक विशेष सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि निहत्थे नागरिकों को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में न लिया जाए और वकीलों, पत्रकारों व अन्य पेशेवरों को उनके पेशेवर काम करने से न रोका जाए।