सुप्रीम कोर्ट ने ED की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली आजम खान की याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर की
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (5 नवंबर) को उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और समाजवादी पार्टी के नेता मोहम्मद आजम खान की रिट याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर किया। इस याचिका में उन्होंने 'डुअल पैन कार्ड' मामले में जेल से रिहा होने के ठीक 40 मिनट बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी थी।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) की बेंच में शामिल जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड दो दिनों के भीतर हाईकोर्ट भेजने का निर्देश दिया। साथ ही हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया गया कि वे इस मामले को चीफ जस्टिस के समक्ष रखें, ताकि इसे 16 नवंबर को डिवीजन बेंच के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सके।
बेंच ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना यह माना कि हाईकोर्ट जाना ही सही रास्ता है। कोर्ट ने आजम खान को अपनी याचिका में संशोधन करने और अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने की छूट दी।
आजम खान की ओर से पेश सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने ED की इस गिरफ्तारी को "शुद्ध उत्पीड़न" करार दिया, क्योंकि यह तब हुई जब उन्हें बाकी सभी मामलों में जमानत मिल चुकी थी।
सिब्बल ने कहा,
"मैं बाकी सभी मामलों में लड़ूंगा, लेकिन मुझे जमानत चाहिए। मैं 80 साल का हूं। उन्होंने मुझे ED के मामले और 28 अन्य मामलों में गिरफ्तार कर लिया है, ऐसे में तो मैं जेल में ही मर जाऊंगा।"
सिब्बल ने तर्क दिया कि यह गिरफ्तारी "दुर्भावनापूर्ण" (Mala Fide) है। उन्होंने कहा कि इसका एकमात्र मकसद यह सुनिश्चित करना है कि आगामी यूपी विधानसभा चुनावों के दौरान आजम खान जेल में ही रहें। उन्होंने बताया कि जैसे ही वे जमानत पर जेल से बाहर आए, ED ने उन्हें तुरंत अपनी हिरासत में ले लिया।
सिब्बल ने सवाल किया,
"घटना 2006 की है और FIR 2019 में दर्ज की गई। इसमें PMLA (धन शोधन निवारण अधिनियम) कैसे लागू होता है?"
उन्होंने यह भी बताया कि "बकरियों और गायों" तक को अपराध से हासिल की गई संपत्ति (Proceeds of Crime) के रूप में दिखाया गया।
सिब्बल ने कहा,
"जरा इन आरोपों को तो देखिए। एक आरोप यह है कि 2016 में आरोपी जबरन उनके घर में घुसे, 5000 रुपये नकद और सोने की बालियां लूट लीं, और बुलडोजर से उनका घर ढहा दिया। फिर दूसरी शिकायत यह है कि उसी दिन आरोपी घर में घुसे, परिवार को धमकाया, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, नकदी लूटी, घर ढहा दिया और 4 बकरियां भी ले गए। बकरियां और गायें अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) बन गईं... यह सब क्या चल रहा है?"
CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी की,
"आपकी दलील में कुछ दम हो सकता है, लेकिन हम इस पर कोई राय नहीं देना चाहते।"
याचिका में ED की गिरफ्तारी और उसके बाद न्यायिक हिरासत (जुडिशियल कस्टडी) का आदेश रद्द करने की मांग की गई। 29 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने दो पैन कार्ड (Dual PAN Card) से जुड़े फर्जीवाड़े के मामले में आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को सुनाई गई सात साल की सजा पर रोक लगाई थी।
खान ने स्पेशल कोर्ट के 1 नवंबर के उस आदेश को भी चुनौती दी, जिसके तहत उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया। अंतरिम राहत के तौर पर उन्होंने हिरासत से रिहाई की मांग की।
Case Title : Mohd Azam Khan v. Directorate of Enforcement