चीफ़ जस्टिस जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (CNLU), पटना के छात्रों के साथ ओपन-हाउस संवाद किया। इस दौरान छात्रों ने पुलिस द्वारा छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई, कॉलेजियम प्रणाली में पारदर्शिता, बढ़ती लॉ स्कूल फीस और पहली पीढ़ी के वकीलों के सामने आने वाली चुनौतियों सहित कई मुद्दों पर सवाल पूछे।

CNLU के मुताबिक, यह पहली बार है जब किसी मौजूदा मुख्य न्यायाधीश ने लॉ छात्रों के साथ इस तरह सीधे, खुले और बिना किसी पूर्व निर्धारित सवालों के संवाद किया है।

कार्यक्रम CNLU के अशोक ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ। इसमें पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और CNLU के चांसलर जस्टिस वी. कामेश्वर राव तथा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर फैजान मुस्तफा भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय की एकेडमिक एंड डिबेटिंग कमेटी और लीगल एड सेल ने किया।

विश्वविद्यालय ने कहा कि हाल ही में NLSIU, बेंगलुरु और NALSAR, हैदराबाद में छात्रों की ओर से CJI के सामने उठाई गई आपत्तियों के बीच पटना में हुआ यह संवाद खास महत्व रखता है।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर CJI ने क्या कहा?

संवाद के दौरान एक छात्र ने CJI से शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शनों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल किया।

इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने छात्रों के लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार के महत्व को भी रेखांकित किया।

पहली पीढ़ी (First Generation) के वकीलों की मुश्किलों पर भी सवाल

छात्रों ने पहली पीढ़ी के वकीलों के सामने आने वाली आर्थिक और पेशेवर चुनौतियों को भी CJI के सामने रखा।

जस्टिस सूर्यकांत ने इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के Sarika Tyagi v. Union of India मामले में दिए गए आदेश का उल्लेख किया।

उन्होंने युवा वकीलों को शुरुआती वर्षों में आर्थिक सहायता देने के लिए Professional Assistance Corpus की जरूरत पर जोर दिया था।

CJI ने कहा कि ऐसे कदम युवा और पहली पीढ़ी के वकीलों को शुरुआती दौर में पेशे में टिके रहने में मदद कर सकते हैं।

कॉलेजियम में असहमति सार्वजनिक क्यों नहीं होती?

एक छात्र ने कॉलेजियम की बैठकों में दर्ज होने वाली असहमति को सार्वजनिक नहीं किए जाने को लेकर सवाल किया।

इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि कॉलेजियम में किसी व्यक्ति की नियुक्ति पर दर्ज नकारात्मक टिप्पणियों को सार्वजनिक करने से उस व्यक्ति की स्थिति मुश्किल हो सकती है।

उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणियों के सार्वजनिक होने से संबंधित व्यक्ति की गरिमा और प्रतिष्ठा पर असर पड़ सकता है।

CJI ने इस पहलू को कॉलेजियम की कार्यप्रणाली में गोपनीयता बनाए रखने के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण बताया।

बढ़ती फीस और स्कॉलरशिप पर भी छात्रों ने उठाई चिंता

छात्रों ने लॉ स्कूलों की लगातार बढ़ती फीस और पर्याप्त स्कॉलरशिप नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया।

CNLU के मुताबिक, CJI सूर्यकांत ने इस मुद्दे पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और कहा कि इस विषय पर ध्यान दिया जाएगा।

5 साल की लॉ डिग्री में अनिवार्य कोर्ट अप्रेंटिसशिप का प्रस्ताव

CNLU के कुलपति प्रोफेसर फैजान मुस्तफा ने कानूनी शिक्षा में बदलाव का प्रस्ताव भी रखा।

उन्होंने सुझाव दिया कि पांच वर्षीय लॉ कोर्स के अंतिम वर्ष में अनिवार्य कोर्ट अप्रेंटिसशिप को शामिल किया जा सकता है।

उनका सुझाव था कि छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही अदालतों में व्यावहारिक अनुभव दिया जाए।

उन्होंने न्यायिक सेवा परीक्षा के लिए अलग से एक साल की प्रैक्टिस की आवश्यकता को हटाने के साथ लॉ कोर्स की संरचना में बदलाव का प्रस्ताव रखा।

विश्वविद्यालय के मुताबिक, CJI सूर्यकांत ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इससे कानूनी शिक्षा और अदालतों के व्यावहारिक अनुभव के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है।

हालांकि, प्रस्ताव का उद्देश्य पांच वर्षीय लॉ कोर्स की कुल अवधि कम करना नहीं, बल्कि उसमें व्यावहारिक कोर्ट अनुभव को शामिल करना है।

हाईकोर्ट में क्लर्कशिप को बेहतर बनाने की बात

पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस वी. कामेश्वर राव ने भी न्यायिक क्लर्कशिप को लेकर सुझाव दिए।

CNLU के मुताबिक, उन्होंने हाईकोर्ट में क्लर्कशिप को अधिक प्रतिस्पर्धी और आर्थिक रूप से आकर्षक बनाने की बात कही।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पटना हाईकोर्ट के न्यायिक क्लर्कों को ऐसी प्रतिस्पर्धी remuneration मिलनी चाहिए, जिससे यह अवसर कॉरपोरेट क्षेत्र में उपलब्ध कानूनी नौकरियों के मुकाबले आकर्षक बना रहे।

इस पूरे संवाद में छात्रों ने न्यायपालिका, कानूनी शिक्षा और वकालत से जुड़े कई व्यावहारिक सवाल सीधे CJI के सामने रखे और CJI सूर्यकांत ने इन मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी।

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