सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA), दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और दिल्ली की डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन से इस बारे में राय मांगी कि क्या उनके चुनाव एक ही तारीख पर कराए जा सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि इस व्यवस्था से सदस्यों द्वारा कई जगहों पर वोट देने की समस्या हल हो सकती है।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने संबंधित बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से कहा कि वे अपने सदस्यों से सलाह लें और इस प्रस्ताव पर विचार करने में कोर्ट की मदद करें।

CJI ने कहा कि एक ही दिन चुनाव कराने से उन वकीलों को, जो कई बार एसोसिएशन के सदस्य हैं, यह चुनना होगा कि वे किस एसोसिएशन में वोट देना चाहते हैं, बजाय इसके कि वे एक से ज़्यादा एसोसिएशन में वोट दें।

उन्होंने कहा,

"क्यों न पूरे दिल्ली, डिस्ट्रिक्ट बार, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के चुनाव दिसंबर में एक ही तारीख पर कराए जाएं? क्योंकि दूसरे चुनाव भी दिसंबर में ही होते हैं। अगर आप एक ही तारीख पर चुनाव कराते हैं, तो कई जगहों पर वोट देने और ऐसी तमाम समस्याएं हल हो जाएंगी। उस एक चुनाव से ही कई सुधार होंगे। 'एक बार, एक वोट' और किसी भी हाल में एक तारीख पर, किसी के पास चुनने का विकल्प हो सकता है। तकनीकी रूप से 'एक बार, एक वोट' वाली बात शायद न हो। लेकिन मान लीजिए कोई तीस हजारी का सदस्य है। वह सुप्रीम कोर्ट बार का भी सदस्य है। वह कहता है कि तीस हजारी डिस्ट्रिक्ट बार के बजाय मैं सुप्रीम कोर्ट में वोट देना पसंद करूंगा। उसे यहां आने दें, लेकिन वहां नहीं। आप जानते हैं, इस तरह की प्रक्रिया हो सकती है।"

कोर्ट SCBA में चुनावी सुधारों से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहा था। कोर्ट ने बार एसोसिएशन से इस बारे में भी सुझाव मांगे कि क्या किसी व्यक्ति के पदाधिकारी के तौर पर काम करने के कार्यकाल (टर्म) की संख्या पर कोई सीमा होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली बार एसोसिएशन के लिए एक ही चुनाव कैलेंडर का सुझाव दिया

CJI ने सुझाव दिया कि SCBA, दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और दिल्ली की डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के चुनाव हर साल एक ही तारीख पर कराए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से उन वकीलों की समस्या हल हो सकती है, जो कई एसोसिएशन के सदस्य हैं, और इससे चुनाव प्रक्रिया को बेहतर बनाने में भी मदद मिल सकती है।

CJI ने सुझाव दिया कि एसोसिएशन एक कॉमन सालाना चुनाव कैलेंडर पर सहमत हो सकते हैं।

उन्होंने कहा,

"उदाहरण के लिए, मान लीजिए नवंबर का पहला हफ़्ता; ऐसा हो सकता है कि चुनाव हमेशा नवंबर के पहले हफ़्ते में ही हों।"

उन्होंने साफ़ किया कि कोर्ट कोई तारीख तय नहीं करेगा और पहले सभी संबंधित पक्षों (स्टेकहोल्डर्स) की राय लेगा। उन्होंने कहा कि अगर एसोसिएशन सहमत होते हैं तो चुनाव की तारीख पहले ही बताई जा सकती है और आने वाले सालों में भी उसी का पालन किया जा सकता है।

CJI ने कहा कि कोर्ट चाहता है कि संबंधित एसोसिएशन के प्रतिनिधि अगली सुनवाई में शामिल हों ताकि कोई भी फ़ैसला लेने से पहले उनकी राय पर विचार किया जा सके।

उन्होंने कहा,

"हम सभी संबंधित पक्षों को साथ लेकर चलेंगे।"

बेंच ने कहा कि चुनाव की एक कॉमन तारीख से "एक बार, एक वोट" (one bar, one vote) के सिद्धांत को लागू करने में आसानी हो सकती है। उदाहरण के लिए, जो वकील डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन और SCBA दोनों का सदस्य है, वह किसी एक एसोसिएशन में वोट देने का विकल्प चुन सकता है, लेकिन उसे दोनों जगह वोट देने की इजाज़त नहीं होगी।

29 मई, 2026 को कोर्ट ने वोटरों और उम्मीदवारों के लिए योग्यता के नए नियम, चुनावी प्रलोभन से बचाव के उपाय और पारदर्शिता व जवाबदेही बढ़ाने के लिए अन्य उपाय तय किए। जुलाई में कोर्ट ने इन सुधारों को 2027-28 के चुनाव चक्र तक टाल दिया और चुनाव समिति को निर्देश दिया कि वह 31 दिसंबर, 2026 तक ज़रूरी बदलावों पर काम जारी रखे।

कोर्ट ने बुधवार को SCBA के सदस्यों की संख्या और उसके चुनावों में वोट देने के योग्य सदस्यों की संख्या के बारे में जानकारी मांगी।

Case Title : Supreme Court Bar Association v. BD Kaushik

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