सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी के 5 नेताओं के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद बंगाल पुलिस को कठोर कार्रवाई करने से रोका
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पांच भाजपा नेताओं अर्जुन सिंह, कैलाश विजयवर्गीय, पवन सिंह, सौरव सिंह और मुकुल रॉय द्वारा उन दायर याचिकाओं पर नोटिस जारी किए, जिनमें भाजपा नेताओं ने उनके खिलाफ बंगाल पुलिस के आपाराधिक मामलों की जांच एक स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की।
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी आदेश दिया कि सुनवाई की अगली तारीख तक आपराधिक मामलों पर याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के लिए तृणमूल कांग्रेस छोड़ने के बाद बैरकपुर निर्वाचन क्षेत्र से सांसद अर्जुन सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने पेश किया कि उनके मुवक्किल पर आपराधिक मामले "गलत तरीके से फंसाने के लिए बनाए गए" हैं।
कैलाश विजयवर्गीय की ओर से पेश वकील प्रशांत कुमार ने प्रस्तुत किया कि मामूली अपराधों के लिए मामले दर्ज किए गए हैं ताकि वह अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में यात्रा ना कर सके।
अन्य याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि उनके खिलाफ मामले "राजनीति से प्रेरित" हैं।
पीठ ने कबीर शंकर बोस द्वारा दायर एक अन्य याचिका पर भी विचार किया, जिन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में यात्रा करते समय उनके साथ मारपीट की गई और हमला किया गया।
बोस की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने कहा कि सीआईएसएफ (एसएसजी) द्वारा संरक्षण दिए जाने के बावजूद उनके मुवक्किल पर हमला किया गया।
जेठमलानी ने कहा,
"मैं सीआईएसएफ (एसएसजी) सुरक्षा वाला एक व्यक्ति हूं, जो सुरक्षा आईबी के खतरे के इनपुट के जारी होने के बाद दी गई है। मुझ पर सीआईएसएफ (एसएसजी) सुरक्षा दस्ता के सामने हमला किया गया।"
हमले के बाद बंगाल पुलिस ने बोस के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज किया। उन्होंने पीठ से आग्रह किया कि वह घटना के संबंध में CISF (SSG) द्वारा दर्ज रिपोर्ट मंगाए और मामले पर पुलिस की कठोर कार्यवाही से संरक्षण दिया।
जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने भी CISF (SSG) को निर्देश दिया कि वह विशेष घटना की रिपोर्ट को सीलबंद कवर में अदालत के समक्ष रखे।