'संसद चलो' छात्र प्रदर्शन: आयोजकों पर कार्रवाई और नाबालिगों के लिए सामुदायिक सेवा की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 20 जुलाई को हुए 'संसद चलो' छात्र प्रदर्शन के आयोजकों के खिलाफ कथित रूप से हिंसा भड़काने के आरोप में कार्रवाई की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले नाबालिगों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने के बजाय उन्हें कम से कम सात दिन की सामुदायिक सेवा (Community Service) करने का निर्देश दिया जाए।
सेवानिवृत्त वायुसेना अधिकारी द्वारा दायर इस याचिका का सीनियर एडवोकेट रिजवान अहमद ने चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत के समक्ष शीघ्र सुनवाई के लिए उल्लेख किया।
उन्होंने दलील दी कि सरकार की प्रतिक्रिया के बावजूद प्रदर्शन के आयोजक लगातार भड़काऊ बयान दे रहे हैं और समाज में वैमनस्य का माहौल बना रहे हैं, इसलिए उनकी जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
याचिका में 20 जुलाई के प्रदर्शन के बाद दर्ज एफआईआर और गिरफ्तारियों को लेकर सभी राज्यों के लिए एक समान राष्ट्रीय नीति बनाने की भी मांग की गई है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि अलग-अलग राज्यों की अलग-अलग नीतियों से भ्रम और असंतोष की स्थिति पैदा हो रही है।
साथ ही, सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले नाबालिगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का उल्लेख करते हुए याचिका में कहा गया है कि ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज करने के बजाय सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए और उन्हें सामुदायिक सेवा का अवसर दिया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को कल या परसों सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।