मामला स्थगन/निपटाने की समय-सीमा तय करने के लिए गाइडलाइंस की मांग: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

Update: 2026-06-05 04:59 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका खारिज की। इस याचिका में देश भर की अदालतों में केस टालने (स्थगन) को रेगुलेट करने, केस निपटाने की समय-सीमा तय करने और केस फ्लो मैनेजमेंट के लिए एक समान राष्ट्रीय पॉलिसी बनाने के लिए कई निर्देश जारी करने की मांग की गई।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने थोड़ी सुनवाई के बाद याचिका खारिज की।

शुरुआत में ही जस्टिस नाथ ने याचिकाकर्ता से - जो खुद पेश हो रहे थे - वकील का बैंड पहनने के बारे में सवाल किया। जब याचिकाकर्ता ने जवाब दिया कि वह एक वकील हैं तो जस्टिस नाथ ने कहा कि एक वकील बैंड तभी पहन सकता है जब वह वकील के तौर पर पेश हो रहा हो, न कि तब जब वह याचिकाकर्ता के तौर पर पेश हो रहा हो।

याचिकाकर्ता ने कहा कि उन्हें इस नियम के बारे में पता नहीं था।

इस पर जस्टिस नाथ ने टिप्पणी की,

"लेकिन आप तो बहुत सी बातें जानते हैं - जैसे सिस्टम कैसे काम करना चाहिए, केस कैसे टाले जाने चाहिए और पॉलिसी कैसे बनाई जानी चाहिए। देखिए आपने क्या-क्या राहत मांगी है।"

याचिकाकर्ता ने जवाब दिया कि उन्होंने सिर्फ गाइडलाइंस मांगी थीं।

जस्टिस नाथ ने सुझाव दिया कि उन्हें इसके बजाय प्रोफेशनल संस्थाओं से संपर्क करना चाहिए।

उन्होंने कहा,

"बार काउंसिल ऑफ इंडिया, स्टेट बार काउंसिल या हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, डिस्ट्रिक्ट कोर्ट बार एसोसिएशन के पास जाइए।"

जब याचिकाकर्ता ने कहा कि ऐसे निर्देश जारी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ही सही अथॉरिटी है तो जस्टिस नाथ ने जवाब दिया,

"नहीं-नहीं, हम वकीलों से दुश्मनी नहीं मोल लेना चाहते। हम वकीलों के दोस्त हैं।"

इसके बाद कोर्ट ने याचिका खारिज की।

इस रिट याचिका के ज़रिए, याचिकाकर्ता ने पूरे भारत की सभी अदालतों में केस टालने (स्थगन) को रेगुलेट करने के लिए गाइडलाइंस मांगी थीं। उन्होंने ऐसी गाइडलाइंस की मांग की थी जो केस टालने को सिर्फ़ खास और सही वजहों तक सीमित रखें, हर बार केस टालने के लिए विस्तृत कारण बताना ज़रूरी करें, दोनों पक्षों को केस में पहले कितनी बार केस टाला गया, इसकी जानकारी देना ज़रूरी करें, बिना वजह केस टालने पर सही और कड़ा जुर्माना लगाएं और CPC और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत केस टालने से जुड़े प्रावधानों को सख्ती से लागू करना सुनिश्चित करें।

याचिकाकर्ता ने केस को तय समय में निपटाने के लिए भी निर्देश मांगे। उन्होंने कई उपाय सुझाए, जैसे अलग-अलग तरह के केस के लिए समय-सीमा तय करना (जिसमें केस की जटिलता के आधार पर लचीलापन हो), कार्यवाही के शुरुआती चरणों में केस मैनेजमेंट हियरिंग ज़रूरी करना, तय समय-सीमा से ज़्यादा देरी होने पर लिखित कारण बताना और केस की प्रगति की समय-समय पर निगरानी और रिपोर्टिंग करना।

याचिकाकर्ता ने देश की सभी अदालतों के लिए एक समान राष्ट्रीय 'केस फ़्लो मैनेजमेंट पॉलिसी' बनाने और उसे लागू करने की भी मांग की। प्रस्तावित पॉलिसी में कार्यवाही के लिए चरण-दर-चरण समय-सीमा तय करने, सुनवाई टालने (स्थगन) को नियंत्रित करने, उचित मामलों में लगातार और रोज़ाना सुनवाई करने और पुराने व लंबे समय से लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने की बात कही गई।

Case Title – Writ Petition (Civil) No. 000578-000578/2026

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