बच्चों के ऑनलाइन यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े कंटेंट को हटाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी न देने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को लगाई फटकार
24 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और कानून और न्याय मंत्रालय (MoLJ) को एक आखिरी मौका दिया। उन्हें यह बताना था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े कंटेंट (CSEAM) की समस्या को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
रोकथाम की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कोर्ट ने मंत्रालयों से पूछा है कि भविष्य में ऐसे प्लेटफॉर्म्स से होने वाली चूक को रोकने के लिए क्या एहतियाती कदम उठाए जाएंगे।
बता दें, 14 अगस्त को जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने 'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस' (JRCA) और 'बचपन बचाओ आंदोलन' की अर्ज़ी पर नोटिस जारी किया। यह अर्ज़ी एक मीडिया रिपोर्ट के बाद दायर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम ने CSEAM को बढ़ावा देने वाले पेड विज्ञापन दिखाए। अर्ज़ी में सुप्रीम कोर्ट के पिछले निर्देशों और प्लेटफॉर्म्स की कानूनी ज़िम्मेदारियों के पालन को लेकर गंभीर चिंता जताई गई।
सितंबर, 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चों से जुड़े पोर्नोग्राफिक कंटेंट को बिना डिलीट किए या बिना रिपोर्ट किए स्टोर करना, उसे आगे भेजने (ट्रांसमिट करने) के इरादे को दिखाता है और इसलिए यह 'बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम' (POCSO Act) के तहत अपराध है। इसके बाद 15 अगस्त को बेंच ने नोटिस जारी किया और याचिकाकर्ताओं को संबंधित प्लेटफॉर्म्स को मामले में शामिल करने (Impleadment) के लिए अर्ज़ी देने की इजाज़त दी। साथ ही मुख्य याचिका में 23 सितंबर 2024 के निर्देशों को लागू करना सुनिश्चित करने को भी कहा।
जब 24 सितंबर को मामला सुनवाई के लिए आया तो एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने MeitY और MoLJ की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए कुछ समय मांगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस पर काम कर रही है और जल्द ही हलफनामा दाखिल करेगी।
इस पर बेंच ने पूछा कि इतने गंभीर मामले में अब तक कोई जवाब क्यों दाखिल नहीं किया गया, खासकर तब जब पिछला आदेश एक महीने पहले ही दिया गया था।
इसमें कहा गया:
"14 अगस्त, 2026 के हमारे आदेश के ज़रिए, हमने भारत सरकार को - इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और कानून और न्याय मंत्रालय के माध्यम से - मिसलेनियस एप्लीकेशन (विविध आवेदन) के विषय पर अपना जवाब/रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। दुर्भाग्य से, आज तक ऐसा कोई जवाब या रिपोर्ट रिकॉर्ड पर नहीं आया।"
इसने मंत्रालयों से यह भी बताने को कहा कि कोर्ट के पिछले निर्देशों को पूरा करने के लिए क्या सार्थक कदम उठाए गए:
"हमारे सामने का मामला बेहद गंभीर है। हम दोनों मंत्रालयों को अपना जवाब/रिपोर्ट दाखिल करने का एक आखिरी मौका देते हैं। जवाब/रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि दोनों मंत्रालयों ने Crl. Appeal Nos.2161-2162 of 2024 में 23.09.2024 को दिए गए मुख्य फैसले में इस कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों को सार्थक रूप से लागू करने के लिए क्या कदम उठाए और मिसलेनियस एप्लीकेशन में बताई गई इस समस्या को रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए।"
कोर्ट ने संबंधित मंत्रालयों से अपने हलफनामे में यह बताने को कहा कि सोशल मीडिया मध्यस्थों की ओर से होने वाली चूक को रोकने के लिए सरकार भविष्य में क्या सावधानियां बरतेगी।
कोर्ट इस मामले की सुनवाई 15 अक्टूबर को करेगा।
Case Details: JUST RIGHTS FOR CHILDREN ALLIANCE AND ANR.v S. HARISH AND ORS|Diary No. 41028-2026