सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ही आदेश में एक वकील द्वारा दायर 25 जनहित याचिकाओं (PILs) को खारिज कर दिया।
चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता सचिन गुप्ता, जो स्वयं पार्टी-इन-पर्सन के रूप में पेश हुए, ने कहा कि वे अपनी याचिकाएं वापस लेना चाहते हैं।
इस पर CJI ने टिप्पणी करते हुए कहा,
“आपको सीधे कोर्ट आने के बजाय पहले संबंधित प्राधिकरणों के पास जाकर उन्हें जागरूक करना चाहिए। जब उचित समय आएगा, तब हम आपकी याचिकाओं पर विचार करेंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि एक वकील होने के नाते याचिकाकर्ता को मुद्दों का विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से अध्ययन करना चाहिए और पहले अधिकारियों को संवेदनशील बनाने की कोशिश करनी चाहिए।
इन याचिकाओं में कई तरह के नीतिगत मुद्दे उठाए गए थे, जैसे—
भारत में सभी भाषाओं को मिलाकर एक सामान्य लिंक भाषा विकसित करना
कानूनी जागरूकता के लिए टीवी कार्यक्रम शुरू करना
साबुन में उपयोग होने वाले रसायनों का नियमन
देशभर में खाद्य पंजीकरण अभियान चलाना
इसके अलावा, याचिकाओं में भिखारियों, बच्चों, ट्रांसजेंडर और महिलाओं के उत्थान, सरकारी अधिकारियों और न्यायपालिका द्वारा सोशल मीडिया उपयोग के नियमन, हथियारों के उपयोग पर नीति, और आपराधिक मामलों में सजा से जुड़े दिशा-निर्देशों की मांग भी शामिल थी।
अन्य मांगों में त्योहारों को “पब्लिक वेलफेयर डे” घोषित करना, दालों की प्रोसेसिंग के मानकों में बदलाव, अलग-अलग आयु वर्ग के लिए स्मार्टफोन विकसित करना, पशु कल्याण के उपाय, लेदर के विकल्प को बढ़ावा देना, और बोन चाइना उत्पादों के नियमन जैसी बातें भी शामिल थीं।
याचिकाकर्ता ने कानूनी शिक्षा में सुधार, व्यभिचार (adultery) को फिर से अपराध बनाने, राष्ट्रीय प्रतीकों और कैलेंडर में बदलाव, सरकारी योजनाओं के विज्ञापनों के नियमन, दुकानों पर मालिकों के नाम और खानपान की जानकारी अनिवार्य करने, जनसंख्या नियंत्रण, और भारत में “दो गठबंधन प्रणाली” (two-alliance system) की व्यवहार्यता पर समिति गठित करने जैसी मांगें भी की थीं।
गौरतलब है कि पिछले महीने भी सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की चार अन्य PILs को खारिज कर दिया था, जिनमें प्याज और लहसुन के 'तामसिक' होने पर शोध कराने जैसी मांग भी शामिल थी।