भोजन का अधिकार : SC ने को भोजन सुनिश्चित करने के लिए शिकायत निवारण तंत्र को लेकर राज्यों को 4 हफ्ते और दिए 

Update: 2020-02-24 09:22 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा है कि जिन राज्यों ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत भोजन के अधिकार को लेकर जवाब दाखिल नहीं किया है वो अपने जवाब अदालत में दाखिल करें। पीठ इस मामले में चार सप्ताह के बाद सुनवाई करेगी। 

सोमवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता कोइली देवी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) एसए बोबडे, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद आधार कार्ड को राशन कार्ड से लिंक किया गया है और सरकार ने 3 करोड़ राशन कार्ड रद्द कर दिए हैं। वास्तव में जो राशन कार्ड रद्द हुए हैं उनमें से 85 फीसदी कार्ड गरीबों के हैं। 

हालांकि केंद्र सरकार की ओर से पेश अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने इसका विरोध किया। 

गौरतलब है कि दिसंबर 2018 में सभी राज्यों को नोटिस जारी किया था और इस मुद्दे पर उनकी प्रतिक्रिया मांगी है कि क्या राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सभी को भोजन सुनिश्चित करने के लिए उनके पास शिकायत निवारण तंत्र है ? पीठ ने राज्यों को 4 सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया था। 

पीठ ने देश भर में भुखमरी से मौत के मामलों को उजागर करने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया है। 

दलीलों में आरोप लगाया गया है कि आधार कार्ड न होने के कारण सरकारी सामाजिक कल्याण योजना के तहत राशन से वंचित होने के बाद लोगों की भुखमरी से मौत हो गई। 

याचिकाकर्ता कोइली देवी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने प्रस्तुत किया था कि कई आदिवासियों के पास या तो आधार कार्ड नहीं है या वे आधार के साथ लिंक करना नहीं जानते हैं।

इस पर, CJI ने कहा था, "मैं पीठ का हिस्सा था (जिसने आधार मामले का फैसला किया था)। यह बहुत स्पष्ट था कि लोगों को आधार कार्ड ना होने के आधार पर किसी भी सामाजिक कल्याण योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता है।" 

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत शिकायत निवारण तंत्र की अनिवार्य आवश्यकता का उल्लेख करते हुए, न्यायमूर्ति बोबडे ने कहा था कि "हम इस मुद्दे की निगरानी के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति नियुक्त करना चाहते हैं।" CJI ने वकील से नियुक्ति के लिए नाम सुझाने के लिए भी कहा था। 

वहीं केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को सूचित किया था कि रिपोर्ट से पता चलता है कि ये मौत के मामले, (जो याचिका में कहा गया है) भुखमरी के कारण नहीं हैं। आधार ना होने पर किसी को भी भोजन से वंचित नहीं किया गया।  यहां तक ​​कि सरकार ने सभी राज्यों को सभी के लिए भोजन सुनिश्चित करने के लिए अधिसूचना जारी की है।

यह याचिका संतोषी की मां कोइली देवी 

और बहन गुडिया देवी द्वारा दायर की गई है जो झारखंड के सिमडेगा की 11 वर्षीय लड़की थी, जिसकी 28 सितंबर, 2017 को भुखमरी से मृत्यु हो गई थी।

याचिका में आरोप लगाया गया कि संतोषी की मौत उसके परिवार के राशन कार्ड को रद्द करने के बाद हुई क्योंकि यह उनके आधार कार्ड से जुड़ा नहीं था।

याचिका के अनुसार, मार्च 2017 से उन्हें राशन मिलना बंद हो गया। संतोषी की मौत के दिन उसकी मां ने के पास चाय और नमक ही बचे थे। 

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