POSH अधिनियम के तहत ICC की रिपोर्ट के खिलाफ अपील सुन सकता है सशस्त्र बल अधिकरण: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में फैसला दिया कि POSH अधिनियम के तहत गठित आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee – ICC) की रिपोर्ट और उसकी सिफारिशों से आहत कोई भी सैन्य कर्मी, सशस्त्र बल अधिकरण (Armed Forces Tribunal – AFT) के समक्ष अपील दायर कर सकता है।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ ने यह कहते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें कहा गया था कि POSH अधिनियम की धारा 18 के तहत सैन्य कर्मी को ICC की रिपोर्ट के खिलाफ AFT में जाने का कोई अधिकार नहीं है।
अदालत ने कहा कि AFT अधिनियम, 2007 की धारा 14 को यदि POSH अधिनियम की धारा 18 के साथ पढ़ा जाए, तो यह स्पष्ट है कि अपीलकर्ता ने ICC की रिपोर्ट और उसकी सिफारिशों को चुनौती देने के लिए सही मंच यानी AFT का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिकरण को ICC की रिपोर्ट की वैधता और शुद्धता पर कानून के अनुसार विचार करना चाहिए था।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला अपीलकर्ता सैन्य अधिकारी के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न की शिकायत से उत्पन्न हुआ। शिकायत के बाद POSH अधिनियम के तहत एक ICC गठित की गई, जिसने जांच पूरी कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की।
ICC की रिपोर्ट के आधार पर, नौसेना अधिकारियों ने 5 मार्च 2025 को नौसेना अधिनियम, 1957 की धारा 15(2) और नौसेना विनियम 216 के तहत अपीलकर्ता को सेवा समाप्ति (termination) के प्रस्ताव के साथ कारण बताओ नोटिस (show cause notice) जारी किया।
इससे आहत होकर अपीलकर्ता ने AFT में एक मूल आवेदन (Original Application) दायर कर ICC की कार्यवाही और उसके आधार पर जारी कारण बताओ नोटिस को रद्द करने की मांग की।
AFT और हाईकोर्ट का रुख
30 मई 2025 को AFT ने यह कहते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया कि कारण बताओ नोटिस के चरण पर दखल देना उचित नहीं है और अपीलकर्ता को पहले अनुशासनिक प्राधिकारी के समक्ष अपना जवाब देना चाहिए।
इसके बाद, 10 जुलाई 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट ने AFT के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि POSH अधिनियम की धारा 18 के तहत अपीलकर्ता को AFT में अपील करने का कोई अधिकार नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस निष्कर्ष को स्पष्ट रूप से गलत (manifest error) बताया।
न्यायालय ने कहा कि POSH अधिनियम की धारा 18 स्वयं यह प्रावधान करती है कि ICC की सिफारिशों के खिलाफ संबंधित सेवा नियमों के अनुसार “न्यायालय या अधिकरण” के समक्ष अपील की जा सकती है।
अदालत ने कहा:
“हम पाते हैं कि हाईकोर्ट का यह कहना सही नहीं था कि अपीलकर्ता को POSH अधिनियम की धारा 18 के तहत कोई अधिकार नहीं है। अधिकरण ने भी POSH अधिनियम की धारा 18 और AFT अधिनियम, 2007 की धारा 14 के तहत दायर अपील पर विचार नहीं किया।”
आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने:
AFT और दिल्ली हाईकोर्ट के आदेशों को रद्द कर दिया,
और मामला AFT को वापस भेज दिया, ताकि अपीलकर्ता के मूल आवेदन पर POSH अधिनियम की धारा 18 के तहत अपील के रूप में नए सिरे से निर्णय किया जा सके।
इसके साथ ही, अपील स्वीकार (allowed) कर ली गई।