चीन जाने की अनुमति के लिए वीवो अधिकारी को दूतावास से वापसी की गारंटी लाने का निर्देश, सुप्रीम कोर्ट ने दिया एक महीने का समय
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वीवो मोबाइल कम्युनिकेशंस के अधिकारी गुआंगवेन कुआंग को अपने 82 वर्षीय बीमार पिता से मिलने चीन जाने की अनुमति के मामले में चीनी दूतावास से भारत लौटकर मुकदमे का सामना करने की गारंटी लेने के लिए एक महीने का समय दिया। कुआंग के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत अभियोजन चल रहा है।
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। कुआंग की ओर से पेश वकील ने कहा कि वह केवल कंपनी के कर्मचारी हैं।
इस पर जस्टिस संजय कुमार ने कहा कि अदालत यात्रा की अनुमति देने को तैयार है लेकिन उसे यह भरोसा चाहिए कि कुआंग भारत लौटकर अभियोजन का सामना करेंगे।
अदालत ने सुझाव दिया कि कुआंग चीनी वाणिज्य दूतावास से संपर्क कर अपने पिता की बीमारी और उम्र की जानकारी दें तथा उनकी वापसी की गारंटी दिलवाएं। अदालत ने कहा कि यदि ऐसी गारंटी मिलती है तो मामले पर आगे विचार किया जा सकता है। इसके साथ ही सुनवाई एक महीने के लिए टाल दी गई।
कुआंग के वकील ने बताया कि चीन के अस्पतालों के मेडिकल सर्टिफिकेट पहले ही अदालत के समक्ष पेश किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रतिवादी पक्ष कुआंग के पिता की मेडिकल स्थिति की स्वतंत्र रूप से पुष्टि कर ले, तो प्रक्रिया आसान हो सकती है।
इस पर जस्टिस संजय कुमार ने चीन के अस्पतालों से जारी प्रमाणपत्रों पर भरोसा जताते हुए कहा कि अदालत उन्हें संदेह का लाभ देगी और चीन के अस्पतालों में प्रमाणपत्र जारी करने की व्यवस्था को भारतीय अस्पतालों के समकक्ष माना जा सकता है।
कुआंग ने दिल्ली हाईकोर्ट के 9 जुलाई 2026 के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसमें उन्हें अपने बीमार पिता से मिलने के लिए चीन के ग्वांगझोउ जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित अपराध से अर्जित आय, कुआंग के चीनी नागरिक होने और भारत तथा चीन के बीच प्रत्यर्पण संधि या पारस्परिक कानूनी सहायता संधि नहीं होने को अनुमति से इनकार के प्रमुख आधारों में शामिल किया।
अब सुप्रीम कोर्ट ने कुआंग को चीनी वाणिज्य दूतावास से भारत वापसी की गारंटी हासिल करने का अवसर दिया। मामले की अगली सुनवाई एक महीने बाद होगी।