व्यापम व्हिसलब्लोअर डॉ. आनंद राय को बड़ी राहत: सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST Act के तहत लगाए गए आरोप किए रद्द

Update: 2026-02-10 07:59 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के चर्चित व्यापम परीक्षा घोटाले के व्हिसलब्लोअर डॉ. आनंद राय को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ SC/ST (अत्याचार निवारण) Act के तहत लगाए गए आरोपों को रद्द किया।

अदालत ने स्पष्ट कहा कि इस मामले में SC/ST Act के प्रावधानों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मध्य प्रदेश हाइकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें डॉ. राय के खिलाफ जातिगत अत्याचार के मामले में आरोप तय किए जाने को सही ठहराया गया।

अदालत ने संक्षेप में कहा,

“हमने SC/ST Act के दायरे पर विचार किया और यह स्पष्ट है कि की गई कार्रवाई कानून के अनुरूप नहीं है। अपील स्वीकार की जाती है।”

डॉ. आनंद राय की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और एडवोकेट सुमीर सोढ़ी ने पैरवी की।

मामला

यह मामला 15 नवंबर, 2022 का है, जब रतलाम जिले के धराड़ गांव में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा के अनावरण के अवसर पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियोजन के अनुसार इस कार्यक्रम के दौरान JAYS संगठन से जुड़े कुछ लोगों ने जिनमें डॉ. आनंद राय भी शामिल बताए गए, एक सांसद, एक विधायक, कलेक्टर और अन्य अधिकारियों के वाहनों को रोक लिया।

FIR के मुताबिक करीब एक घंटे तक सड़क जाम रही, सांसद और विधायक के साथ कथित रूप से गाली-गलौज हुई और रास्ता साफ कराने पहुंचे पुलिसकर्मियों के साथ झड़प हुई।

आरोप था कि सरकारी वाहनों पर पत्थर फेंके गए और कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए। इस मामले में डॉ. राय का नाम लगभग 40–45 लोगों के साथ एफआईआर में दर्ज किया गया।

ट्रायल कोर्ट और हाइकोर्ट का रुख

18 मार्च, 2025 को Sc/St Act की विशेष अदालत रतलाम ने डॉ. राय के खिलाफ IPC की कई धाराओं के साथ-साथ SC/ST Act की धाराओं के तहत आरोप तय किए। डॉ. राय ने इसे हाइकोर्ट में चुनौती दी।

हाइकोर्ट में डॉ. राय ने तर्क दिया कि SC/ST Act के नियमों के अनुसार जांच किसी उप पुलिस अधीक्षक (DSP) से कम रैंक के अधिकारी द्वारा नहीं की जा सकती, जबकि इस मामले में जांच इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी ने की थी।

उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ किसी प्रकार की जातिसूचक गाली या व्यक्तिगत हिंसा का कोई स्पष्ट आरोप नहीं है और घटनास्थल पर उनकी मौजूदगी भी ठोस रूप से साबित नहीं होती।

हालांकि 3 जुलाई, 2025 को मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज की।

हाइकोर्ट ने कहा कि प्रारंभिक स्तर पर आरोप तय करते समय केवल प्रथम दृष्टया संदेह पर्याप्त होता है और जांच अधिकारी की रैंक को लेकर राज्य सरकार की अधिसूचना के मद्देनज़र कोई अवैधता नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

डॉ. राय ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इसी मामले में जमानत दी थी और SC/ST Act के तहत चल रहे ट्रायल पर रोक भी लगाई।

अब अंतिम सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने यह मानते हुए कि SC/ST Act के तहत आरोप लगाने की कानूनी शर्तें पूरी नहीं होतीं, उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को रद्द कर दिया।

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