NEET-UG 2026 दोबारा परीक्षा को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज, कहा- अब मामला निष्प्रभावी

Update: 2026-07-15 07:52 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा कराने के राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका मंगलवार को निष्प्रभावी मानते हुए खारिज की। कोर्ट ने कहा कि चूंकि दोबारा परीक्षा पहले ही हो चुकी है, इसलिए अब इस याचिका पर सुनवाई का कोई औचित्य नहीं रह गया।

जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि परीक्षा संपन्न हो चुकी है, इसलिए यह विवाद अब समाप्त हो चुका है।

इस पर याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि याचिका में केवल दोबारा परीक्षा को चुनौती नहीं दी गई, बल्कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में संस्थागत सुधारों की मांग भी की गई। उन्होंने अनुरोध किया कि इस मामले को नीट परीक्षा से जुड़े लंबित मामलों के साथ जोड़ा जाए।

इस पर जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा ने मौखिक रूप से कहा कि याचिकाकर्ता राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में सुधार की मांग से संबंधित लंबित याचिकाओं में हस्तक्षेप आवेदन दाखिल कर सकते हैं।

यह याचिका स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की पूर्व सहायक महानिदेशक डॉ. मंगला कोहली ने दायर की थी। उन्होंने 3 मई, 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा को प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद रद्द कर 21 जून को दोबारा परीक्षा कराने के एनटीए के फैसले को चुनौती दी थी।

याचिका में कहा गया कि प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप गंभीर हैं तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए लेकिन इसके लिए लाखों ईमानदार अभ्यर्थियों को दंडित नहीं किया जा सकता, जिनका कथित अनियमितताओं से कोई संबंध नहीं था।

याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि जांच में सामने आई सामग्री के अनुसार कथित गड़बड़ी कुछ विशेष व्यक्तियों, परीक्षा केंद्रों और संगठित गिरोहों तक सीमित थी, न कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया तक। ऐसे में पूरे देश में दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय मनमाना, अत्यधिक और असंगत है तथा यह संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(ग) और 21 का उल्लंघन करता है।

इसके अलावा, याचिका में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में व्यापक तकनीकी और संस्थागत सुधारों की भी मांग की गई। इसमें सुरक्षित डिजिटल प्रश्नपत्र प्रणाली, बायोमीट्रिक सत्यापन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी, कंप्यूटर आधारित परीक्षा व्यवस्था लागू करने और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग भी शामिल थी।

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