सीनियर एडवोकेट पद पर विवाद: सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, पारदर्शिता पर उठे सवाल
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा सीनियर एडवोकेट का दर्जा देने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई। यह याचिका एडवोकेट सतीश चौधरी ने दाखिल की।
याचिका में आरोप लगाया गया कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सीनियर एडवोकेट चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता निष्पक्षता और वस्तुनिष्ठता का पालन नहीं किया। याचिकाकर्ता का कहना है कि अधिक अंक प्राप्त करने के बावजूद उनका नाम विचार के लिए फुल बेंच के सामने नहीं रखा गया, जबकि कम अंक पाने वाले कुछ वकीलों को सीनियर एडवोकेट घोषित कर दिया गया।
याचिका में यह भी कहा गया कि उनके सामाजिक रूप से वंचित वर्ग से होने के पहलू को भी नजरअंदाज किया गया।
मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ के समक्ष हुई, जहां अदालत ने इसे अगले सप्ताह के लिए सूचीबद्ध किया। फिलहाल नोटिस जारी नहीं किया गया।
याचिकाकर्ता ने सीनियर एडवोकेट नामांकन से संबंधित 2017 और 2023 के महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला दिया, जिनमें चयन प्रक्रिया के लिए एक स्थायी समिति और अंक आधारित प्रणाली निर्धारित की गई। इस प्रणाली के तहत अनुभव, फैसलों में योगदान, पब्लिकेशन और इंटरव्यू के आधार पर अंक दिए जाते हैं।
हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस अंक आधारित प्रणाली को समाप्त कर दिया था और प्रक्रिया में बदलाव किया था।