जुबीन गर्ग मौत मामला: कार्यक्रम आयोजक की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, असम सरकार से मांगा जवाब
असम के प्रसिद्ध गायक जुबीन गर्ग की सिंगापुर में नौका यात्रा के दौरान हुई मौत से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कार्यक्रम आयोजक श्याम कानू महंत की जमानत याचिका पर असम सरकार को नोटिस जारी किया।
जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मामले में नोटिस जारी करते हुए जवाब जुलाई के अंत तक दाखिल करने को कहा।
श्याम कानू महंत की ओर से सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल के फरार होने की कोई आशंका नहीं है।
उन्होंने कहा,
"मृत्यु डूबने से हुई। फरार होने का कोई खतरा नहीं है। मेरे पास पैसे नहीं हैं और मेरा पासपोर्ट भी जमा है।"
महंत ने सुप्रीम कोर्ट में गुवाहाटी हाईकोर्ट के 29 मई के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। उन्हें 1 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया और तब से वह न्यायिक हिरासत में हैं।
आरोपपत्र के अनुसार महंत पर आपराधिक साजिश, हत्या, गैर-इरादतन हत्या, साक्ष्य मिटाने, जबरन वसूली, धोखाधड़ी और आपराधिक न्यासभंग सहित भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 19 सितंबर, 2025 को सिंगापुर में एक नौका यात्रा के दौरान जुबीन गर्ग की डूबने से मौत हुई थी। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह केवल दुर्घटना नहीं थी बल्कि एक साजिश का परिणाम थी जिसमें गायक को उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी होने के बावजूद जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में डाला गया।
अभियोजन का आरोप है कि उत्तर-पूर्व भारत महोत्सव के आयोजक महंत ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर ऐसी परिस्थितियां पैदा कीं, जिनके कारण गर्ग की मौत हुई। जांच एजेंसियों का कहना है कि महंत को यह जानकारी थी कि जुबीन गर्ग मिर्गी की बीमारी से पीड़ित थे शराब छोड़ने का उपचार ले चुके थे और डॉक्टरों ने उन्हें शराब, आग तथा जल संबंधी गतिविधियों से दूर रहने की सलाह दी थी।
इसके बावजूद उन पर कथित तौर पर शराब उपलब्ध कराने और नौका यात्रा आयोजित करने का आरोप है। अभियोजन का यह भी दावा है कि महंत ने होटल में कमरों की व्यवस्था में बदलाव कराया ताकि सह-आरोपी लगातार गायक को शराब उपलब्ध करा सके।
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में यह भी कहा कि घटना के बाद महंत मलेशिया चले गए, जिसके बाद उनकी तलाश के लिए लुकआउट नोटिस और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलर्ट जारी करना पड़ा। बाद में उन्हें दिल्ली हवाई अड्डे पर पकड़ा गया। उन पर इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और बातचीत के रिकॉर्ड मिटाने का भी आरोप है।
वहीं महंत ने सभी आरोपों से इनकार किया। उनका कहना है कि वह केवल महोत्सव के सह-आयोजक थे और नौका यात्रा का आयोजन किसी और ने किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने होटल प्रबंधन से विशेष रूप से अनुरोध किया कि जुबीन गर्ग को शराब न दी जाए। उनके अनुसार यह एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना थी और वह घटना के समय नौका पर मौजूद भी नहीं थे।
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्य प्रथम दृष्टया कथित साजिश में महंत की भूमिका की ओर संकेत करते हैं। हाईकोर्ट ने यह भी माना कि इस चरण पर गवाहों को प्रभावित करने या फरार होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया कि मामले में 394 गवाह हैं और अभी आरोप तय होने की प्रक्रिया चल रही है। साथ ही लगभग आठ महीने की हिरासत को अत्यधिक लंबी कैद नहीं माना जा सकता विशेषकर तब जब मुकदमे की सुनवाई के लिए विशेष अदालत का गठन किया जा चुका है।
अब सुप्रीम कोर्ट में महंत की जमानत याचिका पर आगे की सुनवाई जुलाई के अंत में होने की संभावना है।