सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की हेरिटेज साइट्स पर हलफनामा दाखिल न करने पर ASI डायरेक्टर को जारी किया अवमानना ​​का नोटिस

Update: 2026-03-29 08:31 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के डायरेक्टर जनरल को दिल्ली में 173 हेरिटेज स्मारकों के संरक्षण के संबंध में हलफनामा दाखिल न करने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया।

जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस नोंगमेइकाबम कोटिश्वर सिंह की बेंच इस मामले पर सुनवाई कर रही थी। यह सुनवाई राजीव सूरी द्वारा दायर याचिका से शुरू हुई, जिसमें दिल्ली में विभिन्न नागरिक प्राधिकरणों के तहत आने वाले स्मारकों के संरक्षण और निगरानी की मांग की गई। यह मामला मूल रूप से 'शेख अली की गुमटी' से जुड़ा था, लेकिन बाद में इसका दायरा बढ़ाकर अन्य हेरिटेज इमारतों तक कर दिया गया।

कोर्ट ने पाया कि उसके पिछले आदेश (2 फरवरी, 2026) में स्मारकों के निरीक्षण और दस्तावेज़ीकरण के संबंध में विशिष्ट सुझावों वाली 'स्टेटस रिपोर्ट' जमा करने का निर्देश दिया गया। हालांकि, कोर्ट कमिश्नर और सीनियर वकील गोपाल शंकरनारायणन ने सारांश पेश किया, जिसमें बताया गया कि 173 स्मारक ASI के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, लेकिन ASI ने कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए कोई हलफनामा दाखिल नहीं किया।

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बेंच ने टिप्पणी की कि उसके आदेश का जानबूझकर उल्लंघन किया गया। इसलिए बेंच ने ASI के डायरेक्टर जनरल को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा कि उनके खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।

आगे कहा गया,

"कोर्ट अपने आदेश के जानबूझकर किए गए उल्लंघन को अत्यंत गंभीरता से लेता है। इसलिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के डायरेक्टर जनरल को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है, जिसमें उनसे पूछा गया है कि उनके खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। उन्हें अगली सुनवाई की तारीख पर अपने जवाब (कारण बताओ) के साथ व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना होगा।"

दिल्ली सरकार (NCT) के पुरातत्व विभाग के संबंध में कोर्ट ने अपने रिकॉर्ड में दर्ज किया कि विभाग द्वारा पहचाने गए सभी 19 स्मारकों का निरीक्षण कर लिया गया। कोर्ट ने पाया कि स्थान की पहचान और जियो-मैपिंग (भू-मानचित्रण) को छोड़कर, बाकी सभी पहलुओं पर निर्देशों का पालन किया गया। हालांकि, कोर्ट ने रिकॉर्ड पर रखी गई जानकारी को सामान्य प्रकृति का पाया और विभाग को एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इस हलफनामे में प्रत्येक स्मारक के लिए उठाए गए कदमों का विवरण और उनकी अद्यतन (अप-टू-डेट) तस्वीरें शामिल होनी चाहिए।

दिल्ली नगर निगम (MCD) को भी इसी तरह के निर्देश जारी किए गए। MCD के मामले में पहचाने गए 85 स्मारकों में से केवल 62 का ही सर्वेक्षण किया गया और कुछ पहलुओं पर यह प्रक्रिया अभी भी अधूरी थी। कोर्ट ने MCD को निर्देश दिया कि वह प्रत्येक स्मारक की वास्तविक स्थिति और निर्देशों के पालन के संबंध में विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराए। नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) के संबंध में, कोर्ट ने पाया कि पहचाने गए 54 स्मारकों में से केवल दो का ही सर्वे किया गया।

बेंच ने NDMC को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें उसके अधिकार क्षेत्र के भीतर स्मारकों की प्रभावी निगरानी और रखरखाव सुनिश्चित करने के लिए अन्य अधिकारियों के साथ उसकी भूमिका और समन्वय तंत्र का विवरण हो।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक स्मारक के लिए अधिकारियों को पिछले आदेशों में पहचाने गए सभी मुद्दों पर अनुपालन विवरण के अलावा, सटीक स्थान विवरण, जियो-मैपिंग जानकारी और अद्यतन तस्वीरें रिकॉर्ड पर रखनी होंगी।

बेंच ने यह भी निर्देश दिया कि उसका पिछला आदेश इतिहासकार स्वप्ना लिडल को सूचित किया जाए और सुनवाई की अगली तारीख पर उनकी उपस्थिति का अनुरोध किया, यह देखते हुए कि आदेश की सूचना न मिलने के कारण एक विशेष पहलू पर मामले में कोई प्रगति नहीं हुई।

कोर्ट ने आगे "शेख अली की गुमटी" के आसपास के क्षेत्रों से संबंधित योजना के कार्यान्वयन पर भी ध्यान दिया, जिसे दिल्ली NCT सरकार का पर्यटन विभाग उप-ठेकेदारों के माध्यम से क्रियान्वित कर रहा है। इसने विभाग को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि काम की गति धीमी न हो और यह परियोजना एक व्यावसायिक उद्यम न बन जाए। परियोजना पर एक स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी गई।

Case : Rajeev Suri v. Archaeological Survey of India and others SLP (c) 12213/2019

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