हमदर्द मेडिकल इंस्टीट्यूट को सुप्रीम कोर्ट से राहत: 'डीम्ड एफिलिएशन' की अनुमति मिली, 150 MBBS और 49 PG सीटों का रास्ता साफ हुआ
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में हमदर्द इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (HIMSR) को शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए 150 MBBS सीटों और 49 पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटों पर एडमिशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दी।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने फैसला सुनाया कि 'डीम्ड एफिलिएशन' (मानित संबद्धता) की सहमति जामिया हमदर्द (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) द्वारा दी गई मानी जाएगी। हालांकि, यह सहमति हमदर्द परिवार की दो शाखाओं के बीच चल रहे विवाद के अंतिम परिणाम पर निर्भर करेगी।
कोर्ट ने कहा,
"परिणामस्वरूप, हमारे पिछले आदेश (दिनांक 11.02.2026) के क्रम में हम यह मानते हैं कि शैक्षणिक वर्ष 2026-2027 के लिए पहले प्रतिवादी-विश्वविद्यालय द्वारा तीसरे याचिकाकर्ता-संस्थान के पक्ष में 'डीम्ड एफिलिएशन' की सहमति दी गई मानी जाएगी। यह विशेष रूप से उसी शैक्षणिक वर्ष (यानी 2026-2027) की 150 MBBS सीटों और 49 पोस्टग्रेजुएट सीटों के संबंध में लागू होगा।"
कोर्ट ने 27 मई को एक याचिका पर यह आदेश पारित किया। इस याचिका में 49 पोस्टग्रेजुएट स्टूडेंट्स को एनरोलमेंट नंबर जारी करने, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) पोर्टल तक पहुंच बहाल करने और शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए 'डीम्ड एफिलिएशन' की सहमति प्रदान करने के निर्देश देने की मांग की गई।
यह विवाद HIMSR के प्रबंधन और उसकी स्थिति से जुड़ा है। यह विवाद एक पारिवारिक समझौते के बाद सामने आया, जिसके तहत हमदर्द समूह के अंतर्गत संचालित होने वाले विभिन्न संस्थानों का नियंत्रण परिवार की अलग-अलग शाखाओं के बीच बांट दिया गया था। इसके बाद जामिया हमदर्द ने UGC Act और UGC (संस्थान जिन्हें विश्वविद्यालय माना जाता है) विनियम, 2023 के तहत कुछ आपत्तियों का हवाला देते हुए HIMSR को दी गई 'डीम्ड एफिलिएशन' की सहमति वापस ले ली थी।
यह मामला जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जब पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एडमिशन के लिए काउंसलिंग शुरू होने ही वाली थी। उस समय कोर्ट ने NMC को निर्देश दिया था कि वह शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया में HIMSR की 49 पोस्टग्रेजुएट सीटों को भी शामिल करे, ताकि ये सीटें खाली न रह जाएं। इसके बाद 11 फरवरी, 2026 को काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से 49 स्टूडेंट्स के एडमिशन के बाद कोर्ट ने यह माना कि संस्थान के पक्ष में संबद्धता (Affiliation) की सहमति दी गई, बशर्ते कि मामले का अंतिम फैसला क्या आता है। हालिया आदेश शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के दौरान एडमिशन के लिए भी इसी तरह की सुरक्षा प्रदान करता है।
पिछले सप्ताह सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट ध्रुव मेहता ने यह दलील दी कि जब तक NMC पोर्टल तक पहुंच बहाल नहीं हो जाती और संबद्धता से संबंधित मुद्दे हल नहीं हो जाते, तब तक HIMSR शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए अपनी 150 MBBS सीटों को भर नहीं पाएगा।
जामिया हमदर्द की ओर से सीनियर एडवोकेट पी. चिदंबरम ने कहा कि यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स के हित में पारित किए जा रहे आदेशों के आड़े नहीं आएगा। हालांकि उन्होंने कुछ UGC नियमों के अनुपालन, एक विशेषज्ञ समिति की टिप्पणियों और CAG रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों के संबंध में चिंताएं भी व्यक्त कीं।
याचिकाकर्ताओं ने यह वचन दिया कि वे MBBS एडमिशन के लिए अलग से खाते रखेंगे, यूनिवर्सिटी को फीस और भुगतानों का विवरण देंगे, और उठाई गई चिंताओं का समाधान करेंगे।
इन दलीलों पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने 49 पोस्टग्रेजुएट स्टूडेंट्स को नामांकन संख्या जारी करने, NMC पोर्टल तक पहुंच बहाल करने और संस्थान की प्रकटीकरण रिपोर्ट (Disclosure Reports) को स्वीकार करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने आगे यह भी कहा कि अपने 11 फरवरी, 2026 के आदेश के क्रम में शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए HIMSR के पक्ष में जामिया हमदर्द द्वारा संबद्धता की सहमति दी गई मानी जाएगी, बशर्ते कि विशेष अनुमति याचिका (SLP) का अंतिम फैसला क्या आता है।
कोर्ट ने कहा कि यह आदेश मामले के उन विशिष्ट तथ्यों को ध्यान में रखते हुए पारित किया जा रहा है, जो हमदर्द परिवार की दो शाखाओं के बीच एक मध्यस्थता विवाद से उत्पन्न हुए हैं।
Case Title – Asad Mueed & Ors. v. Jamia Hamdard Deemed To Be University & Ors.