Delhi Riots Case: जमानत से इनकार के फ़ैसले के पुनर्विचार की उमर खालिद की अर्ज़ी खारिज की

Update: 2026-04-20 15:11 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद की ओर से दायर समीक्षा याचिका खारिज की। इस याचिका में 5 जनवरी के उस आदेश की समीक्षा की मांग की गई, जिसमें दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश के मामले में उन्हें ज़मानत देने से इनकार किया गया।

बता दें, जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने खालिद और एक अन्य सह-आरोपी शरजील इमाम को ज़मानत देने से इनकार किया था। बेंच ने यह टिप्पणी की थी कि उपलब्ध सामग्री से उनके खिलाफ़ गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है।

बेंच ने कहा था कि अभियोजन पक्ष की सामग्री से प्रथम दृष्टया "एक केंद्रीय और निर्णायक भूमिका" और "योजना बनाने, लोगों को जुटाने और रणनीतिक दिशा देने के स्तर पर संलिप्तता" का खुलासा होता है, जो कि केवल छिटपुट और स्थानीय घटनाओं से कहीं आगे तक फैली हुई थी।

इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले में कुछ अन्य आरोपियों - गुलफ़िशा फ़ातिमा, मीरा हैदर, शिफ़ा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को ज़मानत दी थी।

कोर्ट ने खालिद और इमाम पर यह शर्त भी लगाई कि वे अपनी ज़मानत की अर्ज़ी तभी दोबारा दायर कर सकते हैं, जब गवाहों की गवाही पूरी हो जाए या फिर 5 जनवरी से एक साल का समय बीत जाए।

इस समीक्षा याचिका का ज़िक्र सीनियर वकील कपिल सिब्बल (खालिद की ओर से) ने किया और अनुरोध किया कि इस पर ओपन कोर्ट में सुनवाई की जाए।

अपलोड किए गए 16 अप्रैल के आदेश में कोर्ट ने मौखिक सुनवाई का अनुरोध खारिज किया और कहा कि उसके फ़ैसले की समीक्षा करने का कोई ठोस आधार नहीं है।

"समीक्षा याचिका में मौखिक सुनवाई का अनुरोध खारिज किया जाता है। देरी को माफ़ किया जाता है। समीक्षा याचिका और उसके साथ संलग्न दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद हमें 05.01.2026 के फ़ैसले की समीक्षा करने का कोई ठोस आधार या कारण नज़र नहीं आता। तदनुसार, समीक्षा याचिका खारिज की जाती है।"

Case Details: UMAR KHALID v STATE OF NCT Delhi|Review Petition 14473/2026

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