सुप्रीम कोर्ट ने जातियों के दोबारा वर्गीकरण और आरक्षण को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की मांग करने वाली जनहित याचिकाएं खारिज कीं

Update: 2023-07-04 08:49 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने जातियों के दोबारा वर्गीकरण और आरक्षण को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की मांग करने वाली जनहित याचिकाएं खारिज कीं।

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने आज दो जनहित याचिकाओं (पीआईएल) को खारिज कर दिया, जिसमें क्रमशः "जातियों के दोबारा वर्गीकरण" और "वैकल्पिक आरक्षण नीति बनाने के लिए आरक्षण को धीरे-धीरे समाप्त करने" की मांग की गई थी।

अदालत ने जनहित याचिकाओं को खारिज कर दिया। साथ ही योग्यता की कमी और न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया। इसके अतिरिक्त, अदालत ने तुच्छ मुकदमेबाजी से बचने के लिए याचिकाकर्ता पर जुर्माना भी लगाया।

दोनों याचिकाएं वकील सचिन गुप्ता ने दायर की थीं।

पहली जनहित याचिका का उद्देश्य जातियों के दोबारा वर्गीकरण से संबंधित था। जनहित याचिका से नाराज़ होकर पीठ ने न केवल इसे खारिज कर दिया बल्कि याचिकाकर्ता को हर्जाना भरने का भी आदेश दिया।

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा,

"इस तरह की जनहित याचिकाएं दायर कर अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग हो रहा है। याचिकाकर्ता को एससीबीए के एडवोकेट वेलफेयर फंड में 25,000 रुपये का हर्जाना भरना होगा। याचिकाकर्ता को 2 सप्ताह में रसीद पेश करनी होगी।"

इस कार्यवाही के बाद, अदालत ने उसी याचिकाकर्ता द्वारा दायर एक अन्य जनहित याचिका को संबोधित किया, जिसमें आरक्षण को धीरे-धीरे समाप्त करने और वैकल्पिक आरक्षण नीति के कार्यान्वयन की वकालत की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस जनहित याचिका को भी खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगाया।

केस टाइटल: एडवोकेट सचिन गुप्ता बनाम भारत संघ डब्ल्यू.पी.(सी) नंबर 470/2023 पीआईएल-डब्ल्यू और एडवोकेट सचिन गुप्ता बनाम यूओआई और अन्य। डब्ल्यूपी(सी) संख्या 471/2023 जनहित याचिका


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