23 विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट के जजों को लिखा पत्र, चुनावी गड़बड़ियों का लगाया आरोप; ED-CBI के दुरुपयोग का भी उठाया मुद्दा
भारतीय जनता पार्टी के विरोध में खड़े 23 विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट के जजों को एक संयुक्त पत्र लिखकर देश की चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं।
यह पत्र चीफ जस्टिस सूर्यकांत के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों को भेजा गया।
विपक्षी दलों का आरोप है कि कई चुनावों के नतीजे जनता की वास्तविक इच्छा को नहीं दर्शाते और चुनावी प्रक्रिया में लगातार हस्तक्षेप किया जा रहा है।
पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले दलों में कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कषगम, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार), आम आदमी पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और फॉरवर्ड ब्लॉक सहित अन्य दल शामिल हैं।
पत्र में आरोप लगाया गया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का इस्तेमाल विपक्षी दलों को निशाना बनाने और निर्वाचित सरकारों को गिराने के लिए किया जा रहा है।
विपक्षी दलों ने कहा,
"सरकारी एजेंसियों, विशेष रूप से CBI, ED और NIA का इस्तेमाल केवल विपक्ष को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। इन एजेंसियों का उपयोग चुनावी नतीजों को प्रभावित करने और निर्वाचित सरकारों को गिराने के लिए भी किया जा रहा है।"
पत्र में चुनाव आयोग की नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए गए ।
विपक्ष का दावा है कि वर्ष 2014 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से चुनाव आयोग में हुई नियुक्तियां संदेह के घेरे में रही हैं। साथ ही बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में चुनाव से ठीक पहले कराए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को अनावश्यक बताया गया।
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र के हालिया विधानसभा चुनावों में भी गड़बड़ियां हुईं। उनका कहना है कि चुनाव आयोग में ऐसे लोगों की नियुक्ति की जा रही है, जो सरकार के अनुरूप काम करते हैं।
पत्र में सुप्रीम कोर्ट के अनूप बरनवाल फैसले का उल्लेख करते हुए कहा गया कि बाद में बनाए गए मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून के जरिए चयन समिति से चीफ जस्टिस को बाहर कर दिया गया, जबकि इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है।
पत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी सवाल उठाए गए। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि उन्होंने केंद्र सरकार के प्रति खुला समर्थन दिखाया।
साथ ही चुनाव आयोग पर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन और भाजपा नेताओं के कथित सांप्रदायिक बयानों पर कार्रवाई नहीं करने का भी आरोप लगाया गया।
बिहार में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का उल्लेख करते हुए विपक्ष ने कहा कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए बांग्लादेशी घुसपैठियों का हवाला दिया, लेकिन इस दावे के समर्थन में कोई सार्वजनिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया।
पत्र में कहा गया कि जब अन्य सभी संस्थाएं विफल हो जाती हैं तब जनता न्यायपालिका पर भरोसा करती है। यदि न्यायपालिका भी समय पर हस्तक्षेप नहीं करती, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत होगा।
विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि जिन राज्यों में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां प्रस्तावित विशेष गहन पुनर्विचार अभियान पर फिलहाल रोक लगाने पर विचार किया जाए।
उनका सुझाव है कि इस तरह की प्रक्रिया चुनाव से काफी पहले कराई जाए, ताकि चुनाव आयोग के अधिकारी मतदाताओं का प्रत्यक्ष सत्यापन कर सकें।
इसके अलावा विपक्षी दलों ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के जरिए मतदान को लेकर भी चिंता जताई है और कहा है कि जहां संभव हो, वहां मतपत्र आधारित मतदान प्रणाली को फिर से अपनाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।