NCERT चैप्टर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 'शरारती तत्वों' के खिलाफ कार्रवाई के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कक्षा 8 की एनसीईआरटी सामाजिक विज्ञान की किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' वाले अध्याय को लेकर सोशल मीडिया पर की गई गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियों पर कड़ी नाराज़गी जताई।
चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह उन वेबसाइट्स और उनके संचालकों की पहचान करे, जिन्होंने इस विवाद से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री प्रकाशित की है, ताकि उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके।
चीफ़ जस्टिस ने आदेश देते हुए कहा,
“कुछ तत्वों ने मीडिया में गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार किया है। हम ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई में विश्वास रखते हैं। केंद्र सरकार इन वेबसाइट्स और उनके पीछे के लोगों की पहचान करे और उनकी पूरी जानकारी अदालत को दे, ताकि कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सके।”
आदेश सुनाते समय चीफ़ जस्टिस ने यह भी कहा कि यदि ऐसे लोग देश के बाहर छिपे हुए हों तब भी उन्हें नहीं छोड़ा जाएगा।
हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि वह न्यायपालिका की स्वस्थ और वैध आलोचना के खिलाफ नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी विशेषज्ञ समिति द्वारा न्यायपालिका की कार्यप्रणाली में कमियों को रचनात्मक तरीके से उजागर किया जाता है, तो वह भविष्य के लिए सकारात्मक कदम माना जाएगा।
सुनवाई के दौरान चीफ़ जस्टिस ने उन लोगों की भी आलोचना की जिन्होंने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर अतिरेक और भ्रामक प्रतिक्रियाएं दीं, और कहा कि ऐसे तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी के उस रुख पर भी चिंता जताई जिसमें कहा गया था कि विवादित अध्याय को दोबारा लिख दिया गया है और इसे 2026-27 के शैक्षणिक सत्र से किताबों में शामिल किया जाएगा। अदालत की आपत्ति के बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आश्वासन दिया कि जब तक केंद्र सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति इसकी समीक्षा नहीं कर लेती, तब तक इस अध्याय को दोबारा प्रकाशित नहीं किया जाएगा।