पशु कल्याण बोर्डों के गठन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चार सप्ताह में हलफनामा मांगा

Update: 2026-03-13 06:29 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्य पशु कल्याण बोर्डों के गठन और उनकी कार्यप्रणाली को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए कई राज्यों से जवाब मांगा। कोर्ट ने कहा कि पर्याप्त समय दिए जाने के बावजूद कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अब तक अपना हलफनामा दाखिल नहीं किया।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि 12 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों ने अभी तक अपना हलफनामा दाखिल नहीं किया। इनमें असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, मेघालय, पंजाब, सिक्किम, तमिलनाडु, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के साथ-साथ दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव तथा लद्दाख शामिल हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर वकील सिद्धार्थ लूथरा ने दलील दी कि इस मामले में केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से लंबे समय से निष्क्रियता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 से यह मामला लंबित है लेकिन अब तक कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेश न तो अपना प्रतिउत्तर हलफनामा दाखिल कर पाए हैं और न ही राज्य पशु कल्याण बोर्डों को पूरी तरह सक्रिय किया गया है।

कोर्ट को यह भी बताया गया कि वर्ष 2020 और 2023 में पारित आदेशों के बावजूद केंद्र सरकार, कई राज्यों और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई।

याचिका में पशु क्रूरता निवारण (राज्य पशु कल्याण बोर्ड) नियम, 2018 को अधिसूचित करने की भी मांग की गई। सीनियर वकील लूथरा ने अदालत को बताया कि इन नियमों का मसौदा पिछले लगभग आठ वर्षों से केंद्र सरकार के पास लंबित है और इसे बिना और देरी के अधिसूचित किया जाना चाहिए।

मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया कि वे चार सप्ताह के भीतर राज्य पशु कल्याण बोर्डों के गठन को लेकर हलफनामा दाखिल करना सुनिश्चित करें। अदालत ने चेतावनी भी दी कि यदि तय समय में हलफनामा दाखिल नहीं किया गया तो संबंधित पक्षों पर भारी लागत लगाई जा सकती है।

इसके साथ ही पीठ ने केंद्र सरकार को भी निर्देश दिया कि वह इन प्रस्तावित नियमों पर अंतिम निर्णय की स्थिति बताते हुए अद्यतन स्टेटस रिपोर्ट अदालत में दाखिल करे।

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