राम मंदिर चंदा गबन मामला: सुप्रीम कोर्ट ने SIT में फॉरेंसिक ऑडिटर जोड़ने का दिया निर्देश, मांगी स्टेटस रिपोर्ट

Update: 2026-07-27 10:34 GMT

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट को मिले चंदे के कथित गबन के आरोपों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) में एक फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का निर्देश दिया। साथ ही, अदालत ने SIT से जांच की प्रगति पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।

चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की खंडपीठ राम मंदिर को मिले चंदे के कथित गबन की CBI जांच और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन के ऑडिट की मांग वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ के आईजी एस. किरण की अध्यक्षता में एक SIT गठित की है। खंडपीठ के सुझाव पर उन्होंने फॉरेंसिक ऑडिटर को भी जांच में शामिल करने पर सहमति जताई।

याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामत ने दलील दी कि देशभर से राम मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त चंदे का ऑडिट होना चाहिए और ट्रस्ट को प्राप्त राशि का विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि दानदाताओं को पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

इस पर चीफ़ जस्टिस ने कहा कि फिलहाल अदालत का पूरा ध्यान तेज और गुणवत्तापूर्ण जांच सुनिश्चित करने पर है। उन्होंने कहा कि SIT अपनी रिपोर्ट दाखिल करे, उसके बाद पारदर्शिता और अन्य सुधारात्मक उपायों पर विचार किया जाएगा।

मामले में विभिन्न याचिकाओं के माध्यम से CBI जांच, ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड का फॉरेंसिक ऑडिट, दान और खर्च का सार्वजनिक खुलासा तथा जांच की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराए जाने की मांग की गई है।

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