गुरुवार (15 अक्टूबर) को सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना (UBT) नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) और न्यायपालिका के खिलाफ उनकी टिप्पणियों पर स्पष्टीकरण देने को कहा। यह निर्देश तब दिया गया, जब कोर्ट 'इंडिया' गठबंधन के नेताओं द्वारा भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

अपने आदेश में जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने कहा कि राउत के कहने पर इस याचिका को फिलहाल स्वीकार किया जा रहा है, लेकिन इसके लिए उन्हें अपने आचरण पर स्पष्टीकरण देना होगा।

खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा,

"W.P. (C) No. 1351/2026 (आइटम 25) में, याचिकाकर्ता संख्या 6 की ओर से दायर याचिका को फिलहाल स्वीकार किया जा रहा है, बशर्ते वे अपने आचरण पर स्पष्टीकरण दें।"

'इंडिया' गठबंधन के 13 नेताओं द्वारा संयुक्त रूप से दायर याचिका में राउत 6वें याचिकाकर्ता हैं।

गौरतलब है कि अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कल सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन को न्यायपालिका और CJI सूर्यकांत के बारे में राउत की टिप्पणियों को लेकर उनके खिलाफ 'आपराधिक अवमानना' (criminal contempt) की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति दी।

CJI के खिलाफ राउत की टिप्पणियां

राउत ने CJI की आलोचना की थी, क्योंकि उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मिलने से इनकार कर दिया था। राहुल गांधी कथित चुनावी अनियमितताओं और मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) से जुड़ी चिंताओं को लेकर चीफ जस्टिस से मिलना चाहते थे।

राउत ने आरोप लगाया कि CJI और कई अन्य जजों ने लंदन में BJP नेताओं के साथ बैडमिंटन खेला और BJP मंत्रियों के साथ डिनर पार्टियों में शामिल हुए, लेकिन वह विपक्ष के नेता से नहीं मिल सके।

गुरुवार की सुनवाई के दौरान, CJI ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ताओं में से एक को अपने आचरण पर स्पष्टीकरण देना होगा। CJI ने यह भी कहा कि जज इस बात से वाकिफ हैं कि अदालत के बाहर क्या बयान दिए जा रहे हैं, और वे किसी "हाथीदांत के मीनार" (Ivory Towers - यानी आम दुनिया से कटे हुए) में नहीं रह रहे हैं।

'आपराधिक अवमानना' की कार्यवाही के लिए सहमति देते हुए अटॉर्नी जनरल ने कहा कि मंत्रियों के साथ जजों के बैडमिंटन खेलने वाला राउत का बयान झूठा है। उन्होंने इसके समर्थन में दिल्ली हाईकोर्ट के एक आदेश का हवाला दिया, जिसमें यह बात स्पष्ट हो चुकी है।

AG ने यह भी कहा कि राउत की टिप्पणियों से न्यायपालिका की गरिमा कम हुई है और ये आपत्तिजनक प्रकृति की हैं।

INDIA गठबंधन के नेताओं की याचिका

यह याचिका कांग्रेस नेता राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के 11 अन्य नेताओं ने दायर की, जिसमें मतदाता सूची के SIR (विशेष पुनरीक्षण) के संबंध में चुनाव आयोग की कार्रवाई को चुनौती दी गई।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा, सौगत रॉय (तृणमूल कांग्रेस-ममता बनर्जी), अखिलेश यादव (समाजवादी पार्टी), तेजस्वी प्रसाद यादव (RJD), संजय राउत (शिवसेना UBT), MA बेबी (CPI(M)), D राजा (CPI), महुआ माजी (JMM), सुप्रिया सुले (NCP-शरद पवार) और ET मुहम्मद बशीर (IUML) भी याचिकाकर्ताओं में शामिल हैं। बाद में, विपक्ष के दो और नेता - VCK अध्यक्ष थोल. थिरुमावलवन और NC सांसद सज्जाद अहमद किचलू भी इस याचिका में शामिल हो गए।

याचिका में चुनाव आयोग से उन फाइलों, बैठकों के विवरण (मिनट्स), नोटिंग और चुनाव आयुक्तों द्वारा दर्ज की गई आपत्तियों को सार्वजनिक करने की मांग की गई, जो SIR से जुड़े विवादित फैसलों से संबंधित हैं। इसमें चुनाव में कथित अनियमितताओं की जांच करने और पुनरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र ऑडिट पैनल गठित करने की भी मांग की गई।

INDIA गठबंधन के नेताओं ने चुनाव आयोग के कामकाज और SIR प्रक्रिया को जिस तरह से अंजाम दिया गया, उस पर चिंता जताई। उन्होंने चुनाव आयोग के फैसलों की न्यायिक समीक्षा की मांग की।

Case Title : Case : Rahul Gandhi & Others v. Election Commission of India and others

अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Tags: