सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट से कहा कि वह अभिषेक बनर्जी की उस याचिका पर विचार करे, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ चल रही जांच से जुड़ी मीडिया रिपोर्टिंग के खिलाफ अंतरिम राहत मांगी है। बनर्जी का आरोप है कि जांच से जुड़ी जानकारी बाहर आने की वजह से 'मीडिया ट्रायल' हो रहा है।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ चल रही जांच से जुड़े मामलों की मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगाने की मांग की।

बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और बताया कि कलकत्ता हाईकोर्ट ने उनकी याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार किया था।

बनर्जी की ओर से पेश सीनियर वकील शोएब आलम ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट में सितंबर में ही रिट याचिका दायर कर दी गई थी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि यह मामला उनके रोस्टर (कार्यक्षेत्र) में नहीं आता है।

आलम ने बताया कि उन्होंने हाई कोर्ट के सामने तीन बार इस मामले का जिक्र किया, लेकिन बनर्जी के अधिकारों का उल्लंघन लगातार जारी है और उनसे जुड़े लेख रोज प्रकाशित हो रहे हैं।

उन्होंने दलील दी कि अदालतों ने कई बार कहा है कि 'मीडिया ट्रायल' के जरिए किसी व्यक्ति के 'निर्दोष होने की धारणा' (Presumption of Innocence) को कमजोर नहीं किया जा सकता।

आलम ने बताया कि बनर्जी इन रिपोर्टों को हटाने (take-down) का आदेश चाहते हैं और हाईकोर्ट में सभी जरूरी कदम उठाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि वह हाईकोर्ट के सामने इस मामले पर तुरंत विचार करने के लिए फिर से अनुरोध करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने बनर्जी को अनुमति दी कि 16 नवंबर को कलकत्ता हाईकोर्ट के फिर से खुलने पर वे तुरंत इस मामले को कोर्ट के संज्ञान में लाएं।

बेंच ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि वह अंतरिम राहत के लिए बनर्जी की अर्जी पर विचार करे।

Case Title : Abhishek Banerjee v. Union of India and others

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