SIR मामलों पर सुनवाई कर रहीं जज को मिल रही धमकियां: सुप्रीम कोर्ट ने 'बेहतर सुरक्षा' के लिए हाईकोर्ट जाने को कहा

Update: 2026-08-07 14:45 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से अनुरोध किया कि वu बेहतर सुरक्षा की मांग वाली उस याचिका पर विचार करें, जिसे पूर्व जज जस्टिस अनिंदिता रॉय सरस्वती के बेटे ने दायर किया था। जस्टिस सरस्वती अभी पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया के लिए अपीलेट ट्रिब्यूनल के तौर पर काम कर रही हैं।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने याचिकाकर्ता को कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के पास जाने की छूट देते हुए याचिका का निपटारा किया।

कोर्ट ने आदेश दिया,

"यह मामला हाई कोर्ट की एक पूर्व जज को पर्याप्त सुरक्षा देने से जुड़ा है, जो अभी पश्चिम बंगाल राज्य में SIR अपीलेट ट्रिब्यूनल के तौर पर काम कर रही हैं। हमारी राय में याचिकाकर्ता कलकत्ता हाईकोर्ट के माननीय चीफ जस्टिस के पास जा सकते हैं। हम उनसे अनुरोध करते हैं कि वह इस मामले को देखें और ज़रूरत के हिसाब से ज़रूरी कदम उठाएं।"

यह याचिका एडवोकेट अनन्या कांति रॉय सरस्वती ने दायर की थी, जो जस्टिस अनिंदिता रॉय सरस्वती के बेटे हैं। उन्होंने परिवार को मिली धमकियों की स्वतंत्र जांच और पर्याप्त सुरक्षा के लिए निर्देश देने की मांग की। याचिकाकर्ता का कहना है कि जज और उनके परिवार को उनके आधिकारिक कामकाज के सिलसिले में धमकियां मिली हैं। यह भी कहा गया कि इन धमकियों का मकसद SIR ट्रिब्यूनल से जुड़े न्यायिक और अर्ध-न्यायिक कामों को प्रभावित करना है।

याचिका में कहा गया कि 22 अप्रैल, 2026 को ट्रिब्यूनल जाते समय जस्टिस सरस्वती का सड़क हादसा हो गया और पुलिस का मानना ​​था कि यह एक सुनियोजित घटना थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि कुछ दिनों बाद, 30 अप्रैल को उनके राजारहाट स्थित घर पर स्पीड पोस्ट से हाथ से लिखा धमकी भरा पत्र भेजा गया, जिसके बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 224, 351(2), 351(4) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि बाद में याचिकाकर्ता के कोलकाता स्थित घर पर भी लगभग वैसा ही धमकी भरा पत्र भेजा गया और CCTV की वायरिंग के साथ छेड़छाड़ की गई।

याचिका में दावा किया गया कि धमकी भरे संदेशों में चेतावनी दी गई कि अगर SIR प्रक्रिया में अपीलेट ट्रिब्यूनल के तौर पर काम करते हुए जस्टिस सरस्वती ने मुस्लिम लोगों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं किए तो उन्हें और उनके परिवार को मार दिया जाएगा। याचिका में कहा गया कि ये धमकियां परिवार को डराने और न्यायिक कामकाज में दखल देने की एक सोची-समझी कोशिश का हिस्सा थीं।

बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा न मिलने का आरोप लगाते हुए याचिकाकर्ता ने खतरे का व्यापक आकलन करने, सशस्त्र पुलिस सुरक्षा देने और जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने या कोर्ट की निगरानी में एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने की मांग की।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका के गुण-दोष पर विचार नहीं किया और हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से सुरक्षा के मुद्दे पर विचार करने और ज़रूरी कदम उठाने का अनुरोध किया।

Case Title: Ananya Kanti Roy Saraswati v. Union of India & Ors.

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